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4 जून, 2020|4:07|IST

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चैत्र नवरात्रि 2020: भगवान ब्रह्मा ने प्रतिपदा के दिन की थी सृष्टि की रचना, जानिए इसका महत्व

navratri 2020

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी वर्ष प्रतिपदा से वर्ष का आरंभ माना जाता है। चैत्र से देश में ताप के प्रभाव की शुरुआत होती है। चैत्र और आश्विन समान दिन और रात के महीने होते हैं। इस समय प्रकृति में संतुलन होता है और प्राणियों में भी संतुलन पाया जाता है। इस कारण यह शक्ति के आह्वान का पक्ष बन जाता है। इस पक्ष की नवरात्रि में देवी का अनुष्ठान किया जाता है। वासंतिक एवं शारदीय नवरात्रि में माता भगवती की पूजा का आह्वान जीवन में शक्ति और सृजन को बनाए रखने के लिए हैै।

यह सृष्टि का पहला दिन है। परम पुरुष जब अपनी प्रकृति से मिलने आते है, तो वह वसंत में चैत्र का माह होता है। उनके मिलन से ही प्रकृति में उष्णता, पेड़-पौधों एवं जीव-जंतु में नवजीवन का संचार हो जाता है। इसलिए सारा संसार चैत्र का मंगल गीत गाता है। वैष्णव दर्शन में चैत्र मास भगवान नारायण का मास माना जाता है। इसके आध्यात्मिक स्वरूप के कारण परमात्मा भी पृथ्वी पर आते हैं। मान्यता है कि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन परमात्मा ने सृष्टि की रचना की थी। वर्णन है- ‘चैत्रे मासि जगद् ब्रह्मा ससर्ज प्रथमे अहनि। शुक्ल पक्षे समग्रेतु सूर्योदये सति॥'

अर्थात् ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना चैत्र मास के प्रथम दिन, प्रथम सूर्योदय होने पर की। इस शुक्ल प्रतिपदा को सुदी भी कहा जाता है। इसके बाद से सृष्टि निरंतर प्रकाशमान एवं गतिमान रहती है। यह सृष्टि का प्रथम दिन होता है। माना जाता है कि इस समय ग्रह और नक्षत्रों में परिवर्तन शुरू हुआ। भारतीय जीवन में इस दिवस का विशेष महत्व है। पुराण के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर अथाह जलराशि में से प्रथम पुरुष मनु की नौका को निकाला और सुरक्षित स्थान पर पहंुचाया। इन्हीं मनु ने प्रलय की समाप्ति के बाद संसार में प्राणी की विकास यात्रा की शुरुआत की।

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कल्प, युग, सृष्टि का प्रारंभिक मास चैत्र है, इसलिए सूर्य की चमक और चटक के साक्षी सूर्य वंश परंपरा में चरित्र *और धर्म के साक्षात विग्रह श्रीराम इस धरती पर अवतरित *होते हैं। यह नया संवत्सर, विक्रम संवत, आर्य समाज की स्थापना का भी माह है। इस माह में आने वाले उत्सवों में निर्मलता और कोमलता का वास होता है। चैत्र ऐसा माह है, जिसमें धूल-धकड़, कीचड़ नहीं होता और प्रकाश की कमी नहीं होती है। धरती से लेकर आकाश तक सर्वत्र शुद्धता और आलोक फैला होता है। यह चैतन्य और दिव्य भाव हरेक प्राणी के जीवन में प्रवेश करता है।

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  • Web Title:Chaitra Navratri 2020: Lord Brahma created the universe on Pratipada day know its importance