DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

Chaitra Navratri 2019: नेत्र व पुत्र दाता की देवी मानी जाती है मां नेतुला

बिहार के जमुई जिले के सिकंदरा प्रखंड के कुमार गांव में अवस्थित मां नेतुला मंदिर आस्था का केन्द्र है। नेत्र व पुत्र दाता देवी के रूप में मां की ख्याति दूर-दराज तक फैली हुई है। बताया जाता है कि नवरात्र के अवसर पर यहां मेला लगता है। वहीं प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजन का कार्यक्रम होता है। जिले के श्रद्धालु प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को आकर मां के दरवार में हाजिरी भी लगाते हैं। वहीं नवरात्र के अवसर पर जमुई के अलावा नवादा, शेखपुरा, नालंदा, लखीसराय ,गया, गिरिडीह के अलावा बंगाल के आसनसोल समेत कई जगहों से यहां आकर पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए मन्नतें मांगते हैं। लोगों का कहना है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से मां के दरवार में हाजिरी लगाता है उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। स्थानीय लोगों की मानें तो यह मंदिर गंगा यमुनी की संस्कृति को अपने दामन में समेट रखी है। हिन्दूओं के अलावा मुस्लिम संप्रदाय के लोग भी यहां मां के दरवार में आकर अपना हाजिरी लगाते हैं। 

प्रत्येक दिन सुबह- शाम मां का होता है श्रृंगार और आरती
नेतुला मंदिर में प्रत्येक दिन सुबह- शाम मां का श्रृंगार और आरती की जाती है। फूलों से मां का दरवार सजता है। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शक्तिपीठ वैष्णो देवी, विंध्याचल की तरह यहां भी मां की पूजा की जाती है। यूं तो प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं का आना लगा रहता है। लेकिन शारदीय नवरात्र व चैती नवरात्र के समय लोग 9 दिन रहकर मां की पूजा करते हैं। 

Chaitra Navratri 2019: नवरात्रि पर उपवास रख रहे हैं तो जरूर बरतें ये सावधानियां

मंदिर की स्थापना का इतिहास
मंदिर कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरदेव सिंह, सचिव कृष्णनंद सिंह बताते हैं कि 18 वीं शताब्दी में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था। कमेटी के सदस्यों का यह भी मानना है कि बड़े बुजूर्ग बताते हैं कि जब से अपनी होश संभाले हैं तब से मां का दरवार सज रहा है। ऐसी मान्यता है कि दक्ष यज्ञ में भगवती सती के मृत शरीर को लेकर भगवान शिव ने तीनों लोकों में तांडब मचाना शुरू कर दिया था। संपूर्ण सृष्टि भयाकूल हो गयी थी। पृथ्वी पाताल में धंसने लगी थी। तभी देवताओं के अनुरोध पर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित किया था। लोगों का कहना है कि यहां सती की पीठ गिरी थी। जिसके कारण इस मंदिर में मंदिर पीठ ही सुशोभित है। लोग मां के पीठ की ही पूजा करते हैं। वहीं लोगों का यह भी कहना है कि 24 वेंे तीर्थंकर भगवान महावीर जब ज्ञान प्राप्ति के लिए घर छोड़ा था तो पहली रात मां के दरवार में ही वट वृक्ष के नीचे बिताया था। मंगलवार को यहां मंदिर परिसर में बलि भी दी जाती है। 

मंदिर की देखरेख के लिए कमेटी है गठित
नेतुला मंदिर की देखरेख के लिए कमेटी गठित है। 11 सदस्यीय कमेटी में बीडीओ, सीओ के अलावा थाना प्रभारी भी शामिल हैं। यह मंदिर धार्मिक न्यास बोर्ड से भी संबंद्ध है। कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हरदेव सिंह बताते हैं कि स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर का रख-रखाव किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकारी के अलावा स्थानीय लोग भी इस मंदिर के प्रति पूरी आस्था रखते हैं। 

कैसे पहुंचें मां के दरवार में
जमुई रेलवे स्टेशन से मां नेतुला मंदिर की दूरी करीब 30 किलोमीटर है। वहीं शेखपुरा से 33 किलोमीटर और लखीसराय से भी मंदिर की दूरी 30 किलोमीटर है। मंदिर से नवादा की दूरी 53 किलोमीटर है। जबकि नालंदा की दूरी 60 किलोमीटर है। लखीसराय रेलवे स्टेशन आने के लिए बस भी  मिलता है। सिकंदरा चौक से मंदिर जाने के लिए ऑटो उपल्बध है। वहीं जमुई से भी सिकंदरा मंदिर जाने के लिए वाहन मिलते हैं। बसों के अलावा छोटी वाहनों से भी मां नेतुला मंदिर लोग जा सकते हैं। 

पढ़ें माता के इस मंदिर में पूरी होती हैं मनोकामनाएं

क्या कहते हैं मंदिर की पुजारी
कुमार गांव के लोगों के सहयोग से मंदिर में प्रतिदिन पूजा अर्चना होती है। यह मंदिर आस्था का केन्द्र है। भगवान विष्णु ने जब सती के शरीर को खंडित किया था तो उनका पीठ यहां गिरा था। इस मंदिर में मां के पीठ की पूजा होती है। मां नेतुला की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है। 1954 में इस मंदिर का पुन: जीर्णोद्धार किया गया था। गिद्धौर के चंदेल वंश के राजा रावणेश्वर ने 18 वीं शताब्दी में इस मंदिर का पहले जीर्णोद्धार कराया था।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Chaitra Navratri 2019: worship mata netula in navratas of bihar jamui
Astro Buddy