भैरव जयंती कल, श्री बटुक भैरव पिण्ड के दर्शनमात्र से दूर होती है भक्तों की बाधा - Bhairav Jayanti kal Shri Batuk Bhairav pind ke darshanmatra se door hoti h bhakton ki badha DA Image
6 दिसंबर, 2019|1:41|IST

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भैरव जयंती कल, श्री बटुक भैरव पिण्ड के दर्शनमात्र से दूर होती है भक्तों की बाधा

sri batuk bairav in karnailganj gonda

नगर के कोतवाल कहे जाने वाले श्रीबटुक भैरव का जन्मोत्सव अखण्ड ज्योति स्थापना के साथ ही शुरू हो गया। दो दिवसीय इस कार्यक्रम को लेकर नगर ही नहीं मण्डल के कई हिस्सों से भक्तों का आना शुरू हो चुका है। मां काली के पुत्र श्री भैरवनाथ का यह अदभुद पिण्ड नगर के बीचोबीच स्थित विशाल मंदिर में स्थापित है। अतीत की तमाम किवदंतियों के चलते इस मंदिर की अपनी एक अलग ही पहचान है। यहां हर सोमवार को मेले का आयोजन किया जाता है। लोगों का मानना है कि यहां मनौती मांगने से शीघ्र पूरी होती है।

imli tree
 

यही नहीं यहां लगभग 400 वर्ष पुराना एक इमली का पेड़ भी स्थित है। जिसमें हजारों लोहे की कीलें गड़ी हुई है। कहावत है कि अगर किसी भी व्यक्ति के दांतो में दर्द हो तो वहां मात्र एक कील गाड़ देने से दर्द से निजात मिल जाती है। ऐसा करने से पहले कील को 7 बार दांतो से स्पर्श कराना होता है। इस मंदिर की देखरेख का जिम्मा मंहान्तो के जिम्मे है। मौजूदा समय में यहां महन्त गिरिजाशंकर गिरि व रमाशंकर गिरि व्यवस्था संभाल रहे है।


अंग्रेजी शासन काल में मिला था भैरवबाबा का यह पिण्ड : बताया जाता है कि अंग्रेजी शासनकाल में लखनऊ से गोण्डा के लिए रेलवे लाइन विछाने का काम चल रहा था। उस वक्त यहां जंगल हुआ करता था। रेलवे लाइन मौजूदा मंदिर से ही होकर निकाली जा रही थी। उसी वक्त काम कर रहे मजदूरों को यह पिण्ड प्राप्त हुआ। जिसकी सूचना मजदूरों ने अंगेज इंजीनियर को बतायी। जिस पर इंजीनियर ने इसे अलग फेंकने का फरमान जारी कर दिया। लेकिन दूसरे दिन पिण्ड पुनः अपने स्थान पर आ गया। मजदूर रोज पिण्ड को फेंकते लेकिन पिण्ड रोज अपने स्थान पर आ जाता। यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा। पिर एक दिन पिण्ड फेंकने वाले मजदूर बीमार हो गये। और रात में सपने में आकर भैरवबाबा ने अपना परिचय देते हुए आगाह किया। जिसके चलते लाइन को वहां से हटा दिया गया। जिसके चलते लाइन आज भी गोलाकार में है। 

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