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7 दिसंबर, 2020|6:55|IST

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भैरव अष्टमी 2020: तंत्र-मंत्र-यंत्र के संरक्षक देव हैं श्री भैरव

kal bhairav

श्री भैरव को भगवान शिव का रुद्रावतार माना जाता है, जिनको कलियुग का जागृत देवता भी माना गया है। मान्यता है कि इनकी आराधना से सभी तरह के भयों से मुक्ति मिलती है 

अखिल सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार करने वाले देव श्री भैरव हैं, जिन्हें कलियुग का जागृत देवता कहा गया है। शाक्त और शैव जगत, दोनों में समान रूप से लोकप्रिय भैरव जी भरण -पूरण के देवता हैं, जिन पर देवी मां और जगत पिता भोले भंडारी सदैव प्रसन्न रहा करते हैं। भैरव का अटूट संबंध माता काली से भी है, तो दूसरी ओर सप्तमातृका से भी ये अभिन्न रूप से जुड़े हैं। ऐसे तो भैरव जी के भक्तों के लिए उनका स्मरण प्रत्येक दिन कल्याणकारी होता है, पर सप्ताह में रविवार और मंगलवार इनका प्रिय दिवस होता है। और प्रत्येक वर्ष भैरव अष्टमी तिथि के दिन  भैरव जी की वार्षिक पूजा धूमधाम से की जाती है। भैरव जी की उपासना देवी पीठ, शैव तीर्थ और स्वतंत्र रूप से भी देखी जाती है।  
तंत्र-मंत्र-यंत्र के ज्ञाता, देवी भक्तों के संरक्षक देव, विपत्ति निवारक भैरव जी की पूजा से शत्रु से मुक्ति, संकट, मुकदमों आदि में विजय की प्राप्ति होती है। इनकी आराधना में निम्न मंत्रों का उच्चारण विशेष फलदायी है- नमो भैरवरूपाय भैरवाय नमो नम:।  
नमो भद्र स्वरूपाय जगधाय नमो नम:।।
कलियुग में नर्वाण मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र के बाद सर्वाधिक प्रभावकारी भैरव उद्धारण मंत्र है, जो विशेष फलदायी है।  शिव-शंकर के प्रत्यक्ष अवतार भैरव जी इनके रुद्र गणों में सर्वश्रेष्ठ हैं। भारत के नए-पुराने शहरों में और यहां तक कि छोटे-छोटे गांव-कस्बों में भी भैरव जी के पूजन स्थान आज  देखे जा सकते हैं। भैरव जी का महाभोग है उड़द का वड़ा, पंचमेवा, खीर, गुड़ के मिष्ठान, पेड़ा, बताशा, फल, भुने अनाज और दूध और उससे बने भोग हैं, जिससे ये  प्रसन्न होते हैं।

 

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  • Web Title:Bhairav Ashtami 2020: Shri Bhairava the guardian of Tantra-mantra-yantra