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भाई दूज की कथा-कहानी

Bhai Dooj Katha: भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक माना जाता है भाई दूज का पावन पर्व। वहीं, भाई दूज की पूजा और व्रत बिना कथा सुनें पूर्ण नहीं होते हैं।

भाई दूज की कथा-कहानी
Shrishti Chaubeyलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीMon, 13 Nov 2023 01:49 PM
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Bhai Dooj katha, Bhai Dooj Kahani: दिवाली के बाद भाई दूज का त्योहार आता है, जो भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इस साल भाई का त्योहार 14 और 15 नवंबर दोनों दिन पड़ रहा है। इस दिन बहनें भाई की सलामती के लिए यमराज की पूजा करने के पश्चात भाई को तिलक लगाती हैं। भाई दूज की पूजा के दौरान भाई दूज की कथा सुनना बेहद महत्वपूर्ण और फलदायक माना जाता है। इसलिए भाई दूज पर पढ़ें ये पौराणिक कथा-

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भाई दूज की कथा

भगवान सूर्य नारायण की पत्नी छाया हैं। भगवान सूर्य और छाया के पुत्र और पुत्री हैं यमराज तथा यमुना जी। यमुना जी को अपने भाई यमराज से बड़ा लगाव था। वह उनसे बराबर निवेदन करती रहती कि अपने इष्ट मित्रों के साथ आकर उनके घर भोजन करें। काम की व्यस्तता के चलते यमराज जी बहन की बात को टालते रहे। कार्तिक शुक्ल पक्ष का दिन था। यमुना जी ने अपने भाई को भोजन के लिए अपने घर आने के लिए आमंत्रित कर वचनबद्ध कर दिया। 

यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजा करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया।

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यमुना ने कहा कि भद्र। आप हर साल इसी दिन मेरे घर आया करें। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करें, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक के लिए प्रस्थान किया। इसी दिन से भाई दूज के पर्व की परंपरा का आगाज हुआ। ऐसी मान्यता है कि जो बहनें अपनी भाई का आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यमराज का भय नहीं रहता। इसलिए भैया दूज के दिन यमराज तथा यमुना जी का पूजन किया जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।