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Yellow Sapphire : सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए धारण करें येलो सैफायर, मैरिड लाइफ में आएंगी खुशियां

Gemology : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, धन, सुख-समृद्धि और प्रेम-संबंधों में मिठास लाने के लिए येलो सैफायर रत्न धारण करना बेहद लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इस रत्न से गुरु ग्रह मजबूत होता है।

Yellow Sapphire : सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए धारण करें येलो सैफायर, मैरिड लाइफ में आएंगी खुशियां
Arti Tripathiलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 05 Dec 2023 05:23 AM
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Benefits Of Wearing Yellow Sapphire :  रत्न शास्त्र में येलो सैफायर यानी पुखराज पहनने के कई फायदे बताए गए हैं। मान्यता है कि येलो सैफायर धारण करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे व्यक्ति के जीवन मे करियर और कारोबार में खूब तरक्की करता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में गुरु ग्रह की उच्च स्थिति से जातक जीवन के हर क्षेत्र में कामयाबी मिलती है। वैवाहिक जीवन में खुशहाली का माहौल रहता है। करियर में बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ता है और जीवन में सुख-सुविधाओं में व्यतीत होता है, लेकिन गलत तरीके से पुखराज धारण करने से कई नुकसान भी हो सकते हैं। आइए जानते हैं येलो सैफायर पहनने का सही नियम और फायदे...

येलो सैफायर के फायदे

-येलो सैफायर पहनने से व्यक्ति को नजर दोषों से मुक्ति मिलती है और नेगेटिविटी दूर होती है।

-ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, महिलाओं के लिए पुखराज रत्न बहुत लाभकारी माना जाता है। इससे धारण करने से वैवाहिक जीवन की दिक्कतें दूर होती हैं।

-वकील, जज, टीचर और लेखक से जुड़े नौकरीपेशा वाले लोगों को पुखराज धारण करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से कार्यों की बाधाएं दूर होती है और समाज में खूब मान-सम्मान मिलता है।

-कहा जाता है कि पुखराज पहनने से मानसिक तनाव कम होता है और इससे व्यक्ति ऊर्जा और उत्साह से भरपूर रहता है।

-मान्यता है कि येलो सैफायर धारण करने से व्यक्ति का अध्यात्म में मन लगता है। मन में नकारात्मक विचार नहीं आते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पुखराज धारण करने के विधि :

पुखराज रत्न को गुरुवार के दिन और पुष्य नक्षत्र में धारण करना बेहद शुभ माना गया है।
ज्योतिषीय सलाह लेकर पुखराज रत्न को सोने की अंगूठी में पहनना चाहिए। 
रत्न को धारण करने से पहले इसे गाय के कच्चे दूध और गंगाजल के मिश्रण में डालकर शुद्ध कर लें।
इस रत्न को धारण करने से पहले ऊँ बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का 1 माला जाप करें।
इसके बाद वृहस्पतिदेव का स्मरण करते हुए तर्जनी उंगली में धारण करें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
 

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