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अज्ञानता से मुक्ति पाने को आज करें मां सरस्वती की उपासना

बसंत पंचमी को श्री पंचमी भी कहा जाता है। इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस मनाया जाता है। इस दिन विद्यार्थी अपनी आराध्य देवी मां सरस्वती का पूजन करते हैं। आलस्य और अज्ञानता से मुक्ति पाने के लिए इस दिन मां सरस्वती की उपासना करें। मां सरस्वती की सबसे पहले पूजा भगवान श्रीकृष्ण और भगवान ब्रह्मा ने की। इस दिन भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा भी की जाती है।

वाणी की देवी मां सरस्वती को 'वागेश्वरी' नाम से भी जाना जाता है। मां सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला की देवी कहा जाता है। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को पीले रंग के फूल अर्पित करें। सफेद वस्त्र धारण कराएं। मां सरस्वती का शृंगार करें। मां के चरणों में गुलाल अर्पित करें। मां सरस्वती को पीले फल या मौसमी फलों के साथ बूंदी अर्पित करें। मां को मालपुआ और खीर का भोग लगाएं। मां सरस्वती की पूजा के समय पुस्तकें और वाद्ययंत्रों का भी पूजन करें। इस दिन बच्चों को पढ़ने लिखने का सामान उपहार में देना चाहिए। इस दिन बच्चे की जीभ पर शहद से ॐ बनाना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से बच्चा ज्ञानवान होता है। शिशुओं के अन्नप्राशन के लिए यह दिन अत्यंत शुभ है। परिणय सूत्र में बंधने के लिए भी यह दिन बहुत सौभाग्यशाली माना जाता है। बसंत पंचमी पर संध्याकाल में मां सरस्वती की पूजा करने और गोसेवा से ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में समृद्धि आती है।  

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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  • Web Title:Basant Panchami
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