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Baisakhi 2024 :13 अप्रैल को मनेगी बैसाखी, जान लें इस दिन का महत्व

baisakhi 2024 kab hai date significance : सिखों के नववर्ष के रूप में मनाया जाने वाला बैशाखी पर्व इस साल बुधवार, 13 अप्रैल को है। हर वर्ष अप्रैल के महीने में बैशाखी का पावन पर्व मनाया जाता है।

Baisakhi 2024 :13 अप्रैल को मनेगी बैसाखी, जान लें इस दिन का महत्व
Yogesh Joshiलाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीSat, 13 Apr 2024 08:54 AM
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Baisakhi 2024 : सिखों के नववर्ष के रूप में मनाया जाने वाला बैशाखी पर्व इस साल बुधवार, 13 अप्रैल को है। हर वर्ष अप्रैल के महीने में बैशाखी का पावन पर्व मनाया जाता है। बैसाखी वाले दिन सिख लोग धूमधाम से एक-दूसरे को इस पर्व की बधाइयां देते हैं। बैसाख के महीने में बैसाखी का पर्व विशाखा नक्षत्र की मौजूदगी में हर साल उमंग और उत्साह के साथ आयोजित किया जाता है। बैसाखी का पर्व उत्तरी भारत समेत पंजाब और हरियाणा आदि राज्यों में मनाया जाता है। बैसाखी के दिन सिख धर्म के लोग पारंपरिक तरीके से वस्त्र पहनते हैं और भांगड़ा करते हैं। इसके साथ ही घी व आटे से बने प्रसाद का सेवन करते हैं। बैशाखी के दिन से ही देश के कई हिस्सों में फसलों की कटाई शुरु होती है। 

बैशाखी का महत्व

  • बैशाखी के दिन ही सिखों के 10वें गुरु गोविन्द सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को खालसा पंथ की स्थापना की थी। धर्म की रक्षा करना और समाज की भलाई करने के लिए खालसा पंथ की स्थापना की गई थी।
  • बैशाखी को मेष संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं। 
  • बैशाखी बंगाली कैलेंडर का पहला दिन माना जाता है। बंगाल में इस दिन उत्सव मनाया जाता है। बंगाल में इस दिन बेहद ही शुभ माना जाता है।

बैसाखी का पर्व मनाने के कारण

  • सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर सिंह जी का सिर मुगलों ने आज ही के दिन कलम किया था, जिस कारण भी बैसाखी मनाई जाती है। 
  • बैसाखी वाले दिन ही सिखों ने अपना उपनाम सिंह स्वीकार करके इस पर्व को आयोजित किया था। 
  • बैसाखी वाले दिन गुरु गोविंद सिंह जी का राज्याभिषेक हुआ था, जिस वजह से इस पर्व को को आयोजित किया जाता है। 
  • बैसाखी के दिन को सिखों के तीसरे गुरु अमर दास ने बैसाखी मनाने के लिए चुना था, तभी से बैसाखी का पर्व मनाया जाता है। 
  • सिखों के नौवें गुरु के पुत्रों ने बैसाखी वाले दिन ही सिखों को उपदेश दिया था, जिसके बाद 5 लोगों ने अपने जीवन को हमेशा के लिए खालसा पंथ की रक्षा करने हेतु समर्पित कर दिया। जिन्हें आज हम पंच प्यारे के नाम से जानते हैं, इसलिए बैसाखी का पर्व मनाया जाता है।
  • सिखों के गुरु गोविंद सिंह जी ने वर्ष 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की थी, तभी से बैसाखी मनाई जाती है।
  • बैसाखी वाले दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन  माना जाता है और सिख लोग इसे नववर्ष के तौर पर भी मनाते हैं। .

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