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26 अगस्त, 2020|6:12|IST

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अयोध्या : सप्तपुरियों में प्रथम मानी जाती है देवताओं की यह नगरी

अयोध्या नगरी को भारत की प्राचीन सप्त पुरियों में प्रथम माना गया है। सप्त पुरियों में अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची, अवंतिका (उज्जयिनी) और द्वारका को शामिल किया गया है। अयोध्या नगरी का सबसे पहला वर्णन अथर्ववेद में मिलता है और अयोध्या नगरी को देवताओं की नगरी बताया गया है। देवशिल्पी विश्वकर्मा ने इस नगरी का निर्माण किया।

अयोध्या में भगवान श्रीराम ही नहीं जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ का भी जन्म हुआ था, जो कि श्रीराम के कुल के ही थे। अयोध्या में तीर्थंकर ऋषभनाथ के अलावा अजितनाथ, अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ और अनंतनाथ का भी जन्म हुआ था। इसलिए यह स्थान जैन धर्म के लिए बहुत ही पवित्र भूमि है। तीर्थंकर ऋषभनाथ के पुत्र भरत ने यहां राज किया। राजा भरत का साम्राज्य संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में था। अयोध्या इनकी राजधानी थी। अयोध्या सिख धर्म का भी पवित्र स्थल है। यहां के ब्रह्मकुण्ड नामक स्थान पर गुरु नानकदेव जी ने तप किया था। बौद्ध मान्यताओं के अनुसार बुद्धदेव ने अयोध्या में 16 वर्षों तक निवास किया था। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के अपने धाम जाने के बाद अयोध्या नगरी वीरान हो गई। भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने अयोध्या नगरी को दोबारा बसाया। इसके बाद सूर्यवंश की पीढ़ियों तक अयोध्या का अस्तित्व बरकरार रहा।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।