Auspicious coincidence of Ashtalakshmi faldayi on Dhanteras worship of maa Lakshmi maa Saraswati Ganesh and Kubera in this sthir lagna - धनतेरस पर अष्टलक्ष्मी फलदायी के बन रहे शुभ संयोग, इस स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, गणेश और कुबेर की पूजा DA Image
13 नबम्बर, 2019|12:50|IST

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धनतेरस पर अष्टलक्ष्मी फलदायी के बन रहे शुभ संयोग, इस स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, गणेश और कुबेर की पूजा

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इस बार धनतेरस पर लग्नादि, चंद्र मंगल, सदा संचार और अष्टलक्ष्मी फलदायी शुभ संयोग बन रहा है। दो दिन खरीदारी का भी योग बना है। ज्योतिषाचार्य ब्रह्मदत्त शुक्ल ने बताया कि धनतेरस पर सूर्य कृत उभयचरी नामक महान शुभ फलदायक संयोग निर्मित हो रहा है। धनतेरस और दीपावली पर स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी, गणेश, मां सरस्वती और कुबेर की पूजा सुख समृद्धि का वरदान बनेगा। 

स्थिर लग्न में पूजा शुरू करें : परमट निवासी आचार्य सुनील शास्त्री ने बताया कि पांच दिवसीय दीप महोत्सव का शुभारंभ धनतेरस से होगा। 
25 अक्तूबर को आयुर्वेद के जनक धनवंतरि ऋषि की पूजा होगी। वाराणसी एवं मिथिला पंचांग के अनुसार, दीपावली और धनतेरस में पूजा स्थिर लग्न में आरंभ करें। फिर अपनी सुविधानुसार जबतक इच्छा हो, पूजा करें।

25 अक्तूबर शाम 4:42 बजे से 26 की दोपहर 2:29 बजे तक मुहूर्त

27 अक्तूबर को दीपावली और काली पूजा, गोवर्धन पूजा 28 को होगी


पूजा का शुभ मुहूर्त लग्न में 

वृष लग्न में शाम 6:50 बजे से रात 8:42 तकर्, ंसह लग्न में मध्य रात्रि 1:13 बजे से 3:29 बजे तक, तुला वाले सुबह 5:44 से आठ बजे तक, वृश्चिक में सुबह 8 से 10:15 बजे तक, कुंभ लग्न में दोपहर 2:10 बजे से 3:40 बजे तक पूजा का मुहूर्त है।

प्रदोषकालीन में पूजा शुभ : सनातन परंपरा के अनुसार, सूर्यास्त के तुरंत बाद प्रदोषकालीन समय में भी लक्ष्मी, गणेश की पूजा शुभ मानी गई है। लग्न नहीं पता हो तो सूर्यास्त के आधा घंटा बाद पूजा करनी चाहिए।


काली पूजा मध्य रात्रि में
दीपावली और काली पूजा 27 अक्तूबर को है। काली पूजा मध्य रात्रि में करें। काली पूजा रात 10.30 बजे शुरू करें। रात 11.40 बजे प्राण प्रतिष्ठा के बाद पूजा और आरती करें।
    -ब्रह्मदत्त शुक्ल, ज्योतिषाचार्य

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