Hindi Newsधर्म न्यूज़Amavasya: Jyeshtha Amavasya on 5th or 6th June note pooja vidhi time of pooja muhurta daan

Amavasya 2024: 5 या 6 जून को ज्येष्ठ अमावस्या, नोट करें पूजाविधि, मुहूर्त टाइम, स्नान-दान मुहूर्त

Jyeshtha Amavasya : इस साल 6 जून के दिन ज्येष्ठ अमावस्या पड़ रही है। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन विशेष तौर पर विष्णु जी की पूजा-अर्चना की जाती है।

Shrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीThu, 6 June 2024 12:17 PM
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Jyeshtha Amavasya: हिन्दू धर्म में ज्येष्ठ अमावस्या काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। जून के महीने में पड़ने वाली अमावस्या को ज्येष्ठ अमावस्या के नाम से जाना जाता है। उदया तिथि के मद्देनजर, इस साल 6 जून के दिन ज्येष्ठ अमावस्या पड़ रही है। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन विशेष तौर पर विष्णु जी की पूजा-अर्चना की जाती है। इसलिए आइए जानते हैं ज्येष्ठ अमावस्या का शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, उपाय और महत्व-

कब से शुरू है ज्येष्ठ अमावस्या?
ज्येष्ठ, कृष्ण अमावस्या प्रारम्भ - 07:54 पी एम, जून 05
ज्येष्ठ, कृष्ण अमावस्या समाप्त - 06:07 पी एम, जून 06
स्नान-दान मुहूर्त- सुबह 05.10 - सुबह 7:30 तक 

पितृ दोष और काल सर्प दोष उपाय 
ज्येष्ठ अमावस्या की विशेष तिथि पर कुछ उपायों की मदद से पितृ दोष और काल सर्प दोष से मुक्ति मिल सकती है। इसलिए इस दिन पूरी श्राद्धा के साथ भगवान शिव की आराधना करें। वहीं, पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए इस दिन पितृ स्तोत्र और पितृ कवच का पाठ जरूर करें। ज्येष्ठ अमावस्या पर ब्राह्मणों को भोजन कराने और तर्पण करने से पितरों की कृपा घर के सदस्यों पर बनी रहती है। 

ज्येष्ठ अमावस्या शुभ मुहूर्त 

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:02 ए एम से 04:42 ए एम    
  • प्रातः सन्ध्या- 04:22 ए एम से 05:23 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 11:52 ए एम से 12:48 पी एम    
  • विजय मुहूर्त- 02:39 पी एम से 03:35 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 07:16 पी एम से 07:36 पी एम    
  • सायाह्न सन्ध्या- 07:17 पी एम से 08:18 पी एम
  • अमृत काल- 05:12 पी एम से 06:44 पी एम    
  • निशिता मुहूर्त- 12:00 पी एम से 12:40 ए एम, जून 07

पूजा-विधि
1- स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें
2- गणेश जी को प्रणाम करें
3- विष्णु जी का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
4- अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
5- मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
6- श्री विष्णु चालीसा का पाठ करें
7- पूरी श्रद्धा के साथ विष्णु जी की आरती करें
8- तुलसी दल सहित भोग लगाएं 
9- अंत में क्षमा प्रार्थना करें

महत्व 
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन दान और स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। ज्येष्ठ की अमावस्या पर दान करने से पितृ दोष के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके अलावा ज्येष्ठ अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान जरूर करना चाहिए। वहीं, इस दिन गाय, कौवे और कुत्ते को भोजन कराने से जीवन के कष्ट दूर हो सकते हैं 

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। 

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