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आमलकी एकादशी 2019: मोक्ष के मार्ग पर ले जाता है यह पवित्र व्रत

फाल्गुन मास में शुक्लपक्ष एकादशी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह पवित्र व्रत विष्णुलोक की प्राप्ति कराने वाला माना जाता है। इस एकादशी का महत्व अक्षय नवमी के समान माना जाता है। आमलकी यानी आंवला को शास्त्रों में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है। भगवान विष्णु ने जब सृष्टि की रचना के लिए भगवान ब्रह्मा को जन्म दिया उसी समय उन्होंने आंवले के वृक्ष को जन्म दिया। आंवले को भगवान विष्णु ने आदि वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया। इसके हर अंग में ईश्वर का वास माना गया है। कहा जाता है कि जो प्राणी मोक्ष प्राप्ति की कामना रखते हैं उनके लिए यह व्रत अत्यंत श्रेष्ठ है।

मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से सौ गायों को दान करने के समान फल प्राप्त होता है। इसी दिन सृष्टि के आरंभ में आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति हुई थी। आंवला को देवतुल्य माना गया है। आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु की पूजा करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। जो लोग व्रत नहीं करते हैं वह भी इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करें और स्वयं इसका सेवन भी करें।

दशमी की रात्रि में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए शयन करना चाहिए तथा आमलकी एकादशी के दिन सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की मूर्ति के समक्ष तिल, कुश, मुद्रा और जल लेकर संकल्प लें। आंवले के वृक्ष की पूजा करें। इस वृक्ष के चारों की भूमि को साफ करें और उसे गाय के गोबर से पवित्र करें। पेड़ की जड़ में वेदी बनाकर उस पर कलश स्थापित करें। रात्रि में भागवत कथा व भजन-कीर्तन करते हुए प्रभु का स्मरण करें। द्वादशी के दिन सुबह ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा प्रदान करें।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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  • Web Title:Amalaki Ekadashi