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चिरंजीवी यह तिथि, महाभारत का युद्ध इस दिन हुआ था समाप्त

वैशाख माह में शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के रूप में जाना जाता है। यह तिथि सौभाग्य प्रदान करने वाली है। अक्षय तृतीया को भगवान परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि त्रेता युग का आरंभ और द्वापर युग का समापन इसी दिन हुआ। इसी दिन श्री बद्रीनारायण के पट खुलते हैं।

मान्यता है कि ऋषि वेदव्यास एवं श्रीगणेश द्वारा महाभारत ग्रंथ के लेखन का प्रारंभ इसी दिन से किया गया था। यह दिन महाभारत के युद्ध का समापन का दिन माना जाता है। भगवान श्री परशुरामजी का अवतरण भी इसी दिन हुआ था। इसी दिन माता गंगा का पृथ्वी पर आगमन हुआ। हयग्रीव का अवतार भी इसी दिन हुआ था। ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का उदीयमान भी इसी तिथि पर हुआ। यह तिथि दान-धर्म का अचूक काल मानी जाती है। इसे चिरंजीवी तिथि भी कहते हैं।

वृंदावन में श्री बांकेबिहारीजी के मंदिर में सिर्फ इसी दिन श्रीविग्रह के चरण-दर्शन होते हैं अन्यथा पूरे वर्ष वस्त्रों से ढंके रहते हैं। अक्षय तृतीया पर पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए जल कलश, पंखा, खड़ाऊं, छाता, सत्तू, ककड़ी, खरबूजा, फल, शक्कर, घी आदि का दान ब्राह्मणों को करें। इस दिन कन्या दान का विशेष महत्व है, इसी कारण इस दिन शादी विवाह का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन सोना खरीदने से जीवन में समृद्धि आती है। माना जाता है कि इस दिन खरीदा गया सोना परिवार की पीढ़ियों के साथ बढ़ता जाता है।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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  • Web Title:Akshay Tritiya
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