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26 जनवरी, 2020|2:43|IST

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Akshay Navami 2019 : धरती पर कैसे हुई थी आंवले की उत्पत्ति, जानें इसकी पूजा का क्या है महत्व

amla origin

हिन्दू धर्म में त्योहारों से जुड़ी हुई कई पौराणिक कहानियां हैं। जैसे, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को होने वाली अक्षय नवमी से भी कई पौराणिक कहानियां और मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। अक्षय नवमी को आंवला नवमी भी कहा जाता है। एक पौराणिक कहानी आंवले की उत्पत्ति से जुड़ी हुई है कि कैसे आंवला पृथ्वी पर आया है। आइए, जानते हैं- 


कैसे हुई थी आंवले की उत्पत्ति
मान्यता के अनुसार जब पूरी पृथ्वी जलमग्न हो गई थी, तब ब्रह्मा कमल पुष्प पर विराजमान होकर तपस्या कर रहे थे। वह अपनी कठिन तपस्या में लीन थे। तपस्या करते-करते ब्रह्मा की आंखों से ईश-प्रेम के आंसू टपकने लगे। माना जाता है कि ब्रह्मा के इन्हीं आसुंओ से आंवले की उत्त्पति हुई। तब से आंवले को एक दिव्य फल भी माना जाता है, जिसका इस्तेमाल कई पूजन विधि में भी किया जाता है। 

 

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आंवले की पूजा का महत्व 
आंवला नवमी के संबंध में कथा प्रचलित है कि प्राचीन समय में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर देवी लक्ष्मी ने आंवले के वृक्ष के नीचे शिवजी और विष्णुजी की पूजा की थी। तभी से इस तिथि पर आंवले के पूजन की परंपरा शुरू हुई है।

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  • Web Title:Akshay Navami 2019 the origin story of amla on earth and its significance