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26 जनवरी, 2020|1:56|IST

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Akshay Navami 2019 : अक्षय नवमी पर इस विधि से पूजा करने पर होगी मनोकामना पूरी, जानें इस व्रत का महत्व और पूजा मुहूर्त

lord vishnu

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी मनाई जाती है। अक्षय नवमी को आंवला नवमी भी कहा जाता है। ये दिवाली से 8 दिन बाद पड़ती है। इस साल की अक्षय नवमी 5 नवंबर को है।


अक्षय नवमी का महत्व 
यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए बेहद शुभ दिन माना गया है। धार्मिक मान्यतानुसार, अक्षय नवमी का वही महत्व है जो वैशाख मास की तृतीया यानी अक्षय तृतीया का है। शास्त्रों के अनुसार अक्षय नवमी के दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन द्वापर युग का आरंभ हुआ था। कहा जाता है कि आज ही विष्णु भगवान ने कुष्माण्डक दैत्य को मारा था और उसके रोम से कुष्माण्ड की बेल उत्पन्न हुई। इसी कारण आज के दिन कुष्माण्ड का दान करने से उत्तम फल मिलता है। साथ ही आज के दिन विधि विधान से तुलसी का विवाह कराने से भी कन्यादान तुल्य फल मिलता है।इन नामों से भी जानते हैंपौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा होती है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल नवमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा की तिथि तक आंवले के पेड़ पर निवास करते हैं। अक्षय नवमी के दिन आंवले के पेड़ के अतिरिक्त भगवान विष्णु की भी विधि विधान से पूजा की जाती है। 


यह है पूजा मुहूर्त  
वैसे, तो पूरे दिन पूजा-पाठ का महत्व है लेकिन विशेष पूजा सुबह 06 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 04 मिनट तक का मुहूर्त शुभ होने के साथ विशेष फलदायी है। 


अक्षय नवमी पूजन विधि 
मंगलवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर अपने दाहिने हाथ में जल, अक्षत्, पुष्प आदि लेकर व्रत का संकल्प लें। व्रत संकल्प के बाद आप आंवले के पेड़ के नीचे पूरब दिशा की ओर मुंह करके बैठें। इसके बाद 'ऊँ धात्र्यै नम:' मंत्र से आवाहनादि षोडशोपचार पूजन करें। फिर नीचे लिखे मन्त्रों से आँवले के वृक्ष की जड़ में दूध की धारा गिराते हुए पितरों का तर्पण करें। पितरों का तर्पण करने के बाद आंवले के पेड़ के तने में सूत्र बांधना है। इसके बाद पितरों का तर्पण करने के बाद कपूर या गाय के घी से दीप जलाएं और आंवले के पेड़ की आरती करें। 

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आंवले के पेड़ की पूजा करने के बाद आपको इसी पेड़ के नीचे ब्राह्मण को भोजन कराएं। इसके बाद स्वयं वहां बैठकर भोजन ग्रहण करें। फिर एक पका हुआ कोंहड़ा (कूष्माण्ड) लेकर उसके अंदर रत्न, सुवर्ण, रजत या रुपया आदि रखकर निम्न संकल्प करें- इसके बाद ब्राह्मण को तिलक करके दक्षिणा सहित उस कूष्माण्ड दे दें और निम्न प्रार्थना करें। फिर पितरों को सर्दी से बचाने के लिए अपनी शक्ति अनुसार कम्बल आदि किसी ब्राह्मण को दान करना चाहिए।

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  • Web Title:Akshay navami 2019 date vrat puja vidhi and significance of amla tree pujan