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Ahoi Ashtami Vrat : अहोई के पूजन का शाम को इतने बजे से शुरू होगा शुभ मुर्हुत, नोट कर लें पूजा- विधि और तारों के दिखने का समय

ahoi ashtami 2023 puja vidhi : कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष अष्टमी को अहोई अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस साल अहोई अष्टमी पांच नवंबर को है। इस दिन माता पार्वती के अहोई स्वरूप की अराधना की जाती है।

Ahoi Ashtami Vrat : अहोई के पूजन का शाम को इतने बजे से शुरू होगा शुभ मुर्हुत, नोट कर लें पूजा- विधि और तारों के दिखने का समय
Yogesh Joshiलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 05 Nov 2023 07:32 PM
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Ahoi Ashtami 2023 Puja : इस बार अहोई अष्टमी का पर्व पांच नवंबर को मनाया जाएगा। कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को माताएं अपनी संतान की दीर्घायु व सुख समृद्धि के लिए पूजा अर्चना कर उपवास करेंगी। ऐसे में भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा के प्रवक्ता पंडित अजय शर्मा ने पूजा का शुभ मुर्हुत बताया। पंडित अजय शर्मा ने बताया कि पांच नवंबर को अहोई अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन शाम के समय अहोई माता की तस्वीर के सामने विधि विधान से पूजा अर्चना करनी चाहिए।

अनीता सोनी पांडेय ने बताया कि अहोई अष्टमी के पूजन का शुभ मुर्हुत शाम 5 बजकर 32 मिनट से शाम 8.02 बजे तक रहेगा। अहोई माता को कुमकुम लगाने के बाद फूल चढ़ाए और घी का दीपक जलाकर हलवा-पूरी का भोग लगाए। शाम को कथा सुनकर व तारो का दर्शन करने के बाद उन्हें अर्घ्य देकर व्रत खोले। ज्योतिषी केसी पाण्डेय अध्यक्ष, आचार्य अजय शर्मा, प्रवक्ता ,आचार्य कमलेश गिल्डियाल, परामर्श बोर्ड ने बताया कि बेटों की सलामती के लिए माताएं व्रत रखती है।

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शुभ मुहूर्त-

  • अष्टमी तिथि प्रारम्भ - नवम्बर 05, 2023 को 12:59 ए एम बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त - नवम्बर 06, 2023 को 03:18 ए एम बजे
  • अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त - 05:33 पी एम से 06:52 पी एम
  • अवधि - 01 घण्टा 18 मिनट्स
  • तारों को देखने के लिये साँझ का समय - 05:58 पी एम
  • अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय - 12:02 ए एम, नवम्बर 06

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अहोई अष्टमी पूजा विधि-

  • दीवार पर अहोई माता की तस्वीर बनाएं।
  • रोली, चावल और दूध से पूजन करें।
  • इसके बाद कलश में जल भरकर माताएं अहोई अष्टमी कथा का श्रवण करती हैं।
  • अहोई माता को पूरी और किसी मिठाई का भी भोग लगाया जाता है।
  • इसके बाद रात में तारे को अघ्र्य देकर संतान की लंबी उम्र और सुखदायी जीवन की कामना करने के बाद अन्न ग्रहण करती हैं।
  • इस व्रत में सास या घर की बुजुर्ग महिला को भी उपहार के तौर पर कपड़े आदि दिए जाते हैं।

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