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सर्वपितृ अमावस्या पर 20 साल बाद बन रहा शनिश्चरी का संयोग

इस बार 14 सितंबर को शतभिषा नक्षत्र में पितृ स्वर्ग से धरती पर आएंगे। शतभिषा नक्षत्र में शुरू हो रहे श्राद्धपक्ष में श्राद्ध करने से सौ प्रकार के तापों से मुक्ति मिलेगी। इस वर्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा पर 14 सितंबर (शनिवार) को शततारका (शतभिषा) नक्षत्र यानि धृति योग, वणिज करण एवं कुंभ राशि के चंद्रमा की साक्षी में श्राद्ध पक्ष का आरंभ होगा।

श्राद्धपक्ष अपने कुल, अपनी परंपरा, पूर्वजों के श्रेष्ठ कार्यों का स्मरण करने और उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लेने का है। तथास्तु ज्योतिष संस्थान के आचार्य लवकुश शास्त्री ने बताया कि आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से पितृ पक्ष श्राद्ध आरंभ होता है। उदयातिथि होने के कारण पूर्णिमा का श्राद्ध 14 सितंबर को होने के साथ ही से पितृ पक्ष श्राद्ध आरंभ हो जाएगा जो 28 सितंबर तक चलेगा।

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14 सितंबर को क्योंकि उदया तिथि साकल्यापादिता तिथि मानी जाएगी। बताया कि पितृ पक्ष पितरों का याद करने का समय माना गया है। पितर 2 प्रकार के होते हैं एक दिव्य पितर और दूसरे पूर्वज पितर। दिव्य पितर ब्रह्मा के पुत्र मनु से उत्पन्न हुए ऋषि हैं। पितरों में सबसे प्रमुख अर्यमा हैं, जिनके बारे में गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि पितरों में प्रधान अर्यमा वे स्वयं हैं।

क्यों हैं बना विशेष संयोग
ज्योतिषाचार्य आचार्य लवकुश शास्त्री ने बताया कि नक्षत्र मेखला की गणना से देखें तो शतभिषा नक्षत्र (शततारका) के तारों की संख्या 100 है। इसकी आकृति वृत्त के समान है। यह पंचक के नक्षत्र की श्रेणी में आता है। यह शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा के दिन विद्यमान है। इसलिए यह शुभफल प्रदान करेगा।

शनिश्चरी अमावस्या पर 20 साल बाद संयोग :
आचार्य लवकुश शास्त्री ने बताया कि श्राद्ध पक्ष का समापन 28 सितंबर 2019 को शनिश्चरी अमावस्या के संयोग में होगा। 28 सितम्बर 2019 को सर्वपितृ अमावस्या पर शनिश्चरी का संयोग 20 वर्ष बाद बन रहा है जब भाद्रपद मास की पूर्णिमा से श्राद्ध पक्ष का आरंभ होगा और शनिश्चरी अमावस्या पर समापन।

हालांकि पक्षीय गणना से अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृ पक्ष बताया गया है। क्योंकि पंचागीय गणना में मास का आरंभ पूर्णिमा से होता है। इसलिए पूर्णिमा श्राद्ध पक्ष का पहला दिन माना गया है। इसके बाद पक्ष काल के 15 दिन को जोड़कर 16 श्राद्ध की मान्यता है।

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  • Web Title:After 20 years on the great moon day the coincidence of Shani Sastri
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