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पंचांग-पुराणछोटा सा बच्चा दे गया महात्मा को ज्ञान

लाइव हिन्दुस्तान टीम,मेरठPublished By: Yuvraj
Thu, 08 Apr 2021 02:19 AM
छोटा सा बच्चा दे गया महात्मा को ज्ञान

एक बार किसी एक रेलवे प्लैटफॉर्म पर गाड़ी रुकी हुई तो एक छोटा सा लड़का पानी बेचता हुआ निकला। ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज दी, तो छोटा सा लड़का दौड़कर आया और पानी का गिलास भरकर सेठ की ओर बढ़ा दिया, सेठ ने पूछा, कितने पैसे में? लड़के ने कहा- पच्चीस पैसे।
सेठ ने उससे कहा कि पंदह पैसे में देगा क्या? यह सुनकर वह छोटा सा लड़का हल्की मुस्कान दबाए पानी वापस घड़े में उड़ेलता हुआ आगे बढ़ गया। उसी डिब्बे में एक महात्मा बैठे थे, जिन्होंने यह नजारा देखा था कि लड़का मुस्करा कर मौन रहा।

वह समझ गए कि इस बालक केम जरूर कोई रहस्य उसके मन में होगा। महात्मा नीचे उतरकर उस लड़के के पीछे-पीछे गए। एक स्थान पर महात्मा जी ने उस लड़के को रोका और उस छोटे से लड़के से ट्रेन वाली घटना के बारे में पूछा। साथ ही पूछा कि वह सेठ द्वारा पानी न लिए जाने का के बाद भी हंसता क्यों रहा और फिर बिना कुछ कहे ही वापस क्यों चला आया। क्या तुझे सेठ पर गुस्सा नहीं आया?

छोटा सा लड़का बहुत सहजता से बोला, महाराज, मुझे हंसी इसलिए आई कि सेठजी को प्यास तो लगी ही नहीं थी। वे तो केवल पानी के गिलास का रेट पूछ रहे थे। महात्मा ने पूछा -लड़के, तुझे ऐसा क्यों लगा कि सेठजी को प्यास लगी ही नहीं थी। लड़के ने जवाब दिया -महाराज, जिसे वाकई प्यास लगी हो वह कभी रेट नहीं पूछता। वह तो गिलास लेकर पहले पानी पीता है। फिर बाद में पूछेगा कि कितने पैसे देने हैं? 

पहले कीमत पूछने का अर्थ हुआ कि प्यास लगी ही नहीं है। बच्चा बोला महाराज वास्तव में जिन्हें ईश्वर और जीवन में कुछ पाने की तमन्ना होती है, वे वाद-विवाद में नहीं पड़ते। जिनकी प्यास सच्ची नहीं होती, वे ही वाद-विवाद में पड़े रहते हैं। बस यही सच्चा जीवन है। बच्चे की बात सुनकर महात्मा भी

 

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