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भगवान कृष्ण को अगहन महीना क्यों प्रिय है?

भगवान कृष्ण को अगहन महीना क्यों प्रिय है?

संक्षेप:

आखिर अगहन कृष्ण को इतना प्रिय क्यों है? आइए जानते हैं धार्मिक, आध्यात्मिक, कृषि और मौसम के नजरिए से इसके 7 बड़े कारण।

Mon, 3 Nov 2025 05:16 PMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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हिंदू पंचांग में अगहन यानी मार्गशीर्ष महीना बहुत पवित्र माना जाता है। यह नवंबर-दिसंबर में आता है। इस महीने को भगवान कृष्ण का प्रिय मास कहा जाता है। श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं कृष्ण जी कहते हैं – 'मासानां मार्गशीर्षोऽहम्' अर्थात्: 'मासों में मैं मार्गशीर्ष हूं।'

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आखिर अगहन कृष्ण को इतना प्रिय क्यों है? आइए जानते हैं धार्मिक, आध्यात्मिक, कृषि और मौसम के नजरिए से इसके 7 बड़े कारण।

1. गीता जयंती – कृष्ण का ज्ञान प्रकट

अगहन महीने में गीता जयंती आती है – वह दिन जब भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। मोक्षदा एकादशी इसी मास में पड़ती है। यह ज्ञान, कर्म और भक्ति का पावन संगम है। कृष्ण जी इसी महीने में विश्व को सनातन सत्य सिखाते हैं। इसलिए यह उनका प्रिय मास है।

2. कृषि का उत्सव – अन्नपूर्णा का मास

अगहन में धान की फसल कटकर घर आती है। खेतों में सोना चमकता है। यह अन्नपूर्णा का महीना है। कृष्ण गोप-ग्वालों के स्वामी हैं। वे किसानों के सुख से प्रसन्न होते हैं। गोवर्धन पूजा के बाद यही महीना अन्न-धन की खुशी लाता है। इसलिए कृष्ण इसे प्यार करते हैं।

3. ठंड और शीतलता – कृष्ण की लीला भूमि

अगहन में शीत ऋतु शुरू होती है। सुबह कुहासा, रात में ठंडी हवा। यह मौसम वृंदावन की याद दिलाता है। कृष्ण यमुना तट पर बांसुरी बजाते, गोपियों के साथ रासलीला करते। ठंडी रातें रास का समय थीं। यह मौसम उनकी लीला को जीवंत करता है।

4. दान-पुण्य का महीना

अगहन में दान, जप, तप का विशेष महत्व है। गेहूं, चावल, गुड़, तिल दान करने की परंपरा है। कृष्ण कहते हैं – मुझ में समर्पण ही सच्ची भक्ति है। इस मास में किया गया दान सौ गुना फल देता है। कृष्ण भक्तों की उदारता से प्रसन्न होते हैं।

5. विवाह और शुभ कार्यों का मौसम

अगहन में विवाह सबसे ज्यादा होते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद शुभ मुहूर्त शुरू हो जाते हैं। कृष्ण विवाह बंधन के साक्षी हैं। वे राधा-कृष्ण प्रेम के प्रतीक हैं। इस मास में नए जोड़े उनकी कृपा पाते हैं। इसलिए यह प्रेम और वैवाहिक सुख का मास है।

6. एकादशी व्रत – कृष्ण की भक्ति का द्वार

अगहन में दो एकादशी आती हैं – उत्पन्ना और मोक्षदा। इन व्रतों से पाप नष्ट और मन शुद्ध होता है। एकादशी व्रत कृष्ण भक्ति का सीधा रास्ता है।

7. सूर्योदय की पवित्रता

अगहन में सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर मुड़ते हैं। सूर्य की किरणें शीतल और पवित्र होती हैं। कृष्ण सूर्यवंशी हैं। इस मास में सूर्योपासना (अर्घ्य) का विशेष फल मिलता है।

अगहन महीना ज्ञान, अन्न, प्रेम, भक्ति और प्रकृति का संगम है। यही कारण है कि भगवान कृष्ण इसे सबसे प्रिय मानते हैं। इस मास में गीता पाठ, एकादशी व्रत, दान, सूर्य अर्घ्य करें। कृष्ण कृपा अवश्य मिलेगी।

डिस्क्लेमर: यह खबर विभिन्न माध्यमों, धर्म ग्रंथों और विशेषज्ञों के सलाह पर आधारित है। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए धर्म विशेषज्ञ से उचित सलाह लें।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

Navaneet Rathaur
नवनीत राठौर को मीडिया के अलग-अलग संस्थानों में काम करने का 6 साल से ज्यादा का अनुभव है। इन्हें डिजिटल के साथ ही टीवी मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है। नवनीत फीचर लेखन के तौर पर कई सालों से काम कर रहे हैं और हेल्थ से जुड़ी खबरों को लिखने-पढ़ने का शौक है। और पढ़ें

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