
मंदिर की चौखट पर पैर रखना चाहिए या नहीं? पार करने से पहले करें ये काम
संक्षेप: मंदिर में प्रवेश से लेकर वहां की पूजा-पाठ को लेकर कई तरह के नियम हैं। वहीं मंदिर के चौखट को लेकर भी कुछ नियम हैं, जिनका पालन ना करने पर जाने-अनजाने में देवी-देवताओं का अनादर हो सकता है। ऐसे में ये जानते हैं कि आखिर चौखट पर पैर रखना चाहिए या नहीं?
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है सही नियम का पालन करना। मंदिर में एंट्री से लेकर पूजा-पाठ के कई नियम हैं, जो बहुत कम ही लोग जानते हैं। माना जाता है कि कुछ नियम बेहद ही जरूरी हैं और इन्हें मानने से भगवान मनोकामनाएं जल्दी पूरी करते हैं। मंदिर परिसर की एंट्री के वक्त एक चौखट होता है। इसपर कुछ लोग पैर रखकर जाते हैं तो वहीं कुछ लोग इसे पार कर लेते हैं। वहीं बहुत कम लोग बता पाएंगे कि आखिर सही तरीका क्या है। देश में ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ समेत कई ऐसे मंदिर हैं जहां भीड़ होने के नाते कई बार लोग इस चीज पर ध्यान ही नहीं दे पाते हैं।

चौखट पर नहीं रखते हैं पैर?
मंदिर का चौखट परिसर के एंट्री गेट के पास ही होता है। सनातन धर्म के हिसाब से इस चौखट के जरिए ही मंदिर जैसे पवित्र स्थान और बाहरी दुनिया के बीच बैलेंस बना रहता है। मंदिर के चौखट पर अद्वितीय ऊर्जा होती है। वहीं मंदिर के चौखट और दरवाजे को परिसर की मुख्य ऊर्जा बिंदु भी माना जाता है। मंदिर में प्रवेश के वक्त कभी भी चौखट पर पैर नहीं रखना चाहिए क्योंकि इसे देव द्वार भी कहा जाता है। कुछ मान्यताओं के हिसाब से चौखट पर ही देवी-देवताओं की सूक्ष्म ऊर्जा होती है। ऐसे में अगर चौखट पर पैर रखा जाए तो इससे उनका अनादर होता है।
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अंदर आने से पहले करें ये काम
मंदिर जाने के कई और नियम हैं, जिसमें से एक है जूते-चप्पल उतारकर पैरों को धोना। दरअसल मंदिर के बाहर कई तरह की बुरी ऊर्जा भी होती है। वहीं मंदिर के अंदर की ऊर्जा काफी सकारात्मक होती है। ऐसे में मंदिर की दहलीज को पार करने से पहले पैरों को धोना जरूरी होता है ताकि अंदर की शुद्धता बाधित ना हो।

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