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आस्थाबन रहा है यह ग्रह योग तो अच्‍छी होगी कमाई

पंचांग पुराण टीम,मेरठPublished By: Praveen
Sun, 07 Jun 2020 05:40 PM
बन रहा है यह ग्रह योग तो अच्‍छी होगी कमाई

कुंडली में ग्रहों की कुछ विशेष स्थिति से राशि-परिवर्तन योग बनता है। कुंडली में जब कोई भी दो ग्रह एक-दूसरे की राशि में स्थित हों तो इसे राशि-परिवर्तन योग कहते हैं। राशि परिवर्तन योग मुख्‍यत: तीन तरह के होते हैं और इनका व्‍यक्‍ति के जीवन पर असर भी अलग-अलग पड़ता है।
महायोग: जब कुंडली में शुभ भावों (केंद्र,त्रिकोण,धन भाव, लाभ स्थान) के स्वामी अर्थात शुभ भावेशों का आपस में राशि परिवर्तन होता है तो इसे महायोग कहते हैं। महायोग को बहुत शुभ फल देने वाला माना गया है। इससे कुंडली का बल और सकारात्मक परिणाम बढ़ते हैं। महायोग में जिन दो भावों के स्वामियों में राशि परिवर्तन होता है उन दोनों भावों का बल बहुत बढ़ जाता है। इससे उस भाव से सम्बंधित कारक तत्वों की जीवन में अच्छी प्राप्ति होती है। यदि धनेश और दशमेश में राशि परिवर्तन हो तो ऐसे में व्यक्ति की आजीविका भी अच्छी होगी। उसे कॅरियर में अच्छी सफलता मिलेगी और आर्थिक पक्ष भी अच्छा होगा। यदि लग्नेश और पंचमेश का राशि परिवर्तन हो तो इससे जीवन में अच्छा स्वास्थ्‍य, प्रतिष्ठा, अच्छी शिक्षा और अच्छे संतान सुख की प्राप्ति होगी।
 
दैन्‍य योग: यदि कुंडली पाप या दुःख भावों के स्वामियों (षष्टेश,अष्टमेश,द्वादशेश) का शुभ भावों के स्वामियों के साथ राशि परिवर्तन हो तो इसे दैन्य योग कहते हैं। दैन्य योग को अच्छा नहीं माना जाता। इससे संघर्ष की उत्पत्ति होती है। कुंडली में दैन्य योग बनने पर शुभभाव का स्वामी पाप भाव में होने और पाप भाव का स्वामी शुभ भाव में होने से वह शुभ भाव और उसका स्वामी पीड़ित हो जाते हैं।इससे शुभ भाव से सम्बंधित कारक तत्वों में हानि होती है और संघर्ष का सामना करना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति को स्वास्थ्‍य सम्बंधित समस्याएं बहुत अधिक रहती हैं और जीवन में प्रतिष्ठा एवं धन की कमी रहती है।
 
खल-योग: कुंडली में जब तीसरे भाव के स्वामी का किसी भी शुभ भाव (केंद्र, त्रिकोण लाभ धन आदि) के स्वामी के साथ राशि परिवर्तन हो तो खल योग बनता है। खल योग का परिणाम दैन्य योग की तरह अति नकारात्मक तो नहीं होता पर दैन्य योग को भी अच्छा नहीं माना गया है। इसमें तृतीयेश का जिस शुभ भाव के स्वामी से राशि परिवर्तन होता है उस भाव के कारक तत्वों की प्राप्ति में संघर्ष या अधिक पुरुषार्थ करना पड़ता है।ऐसे व्यक्ति को अपनी आजीविका या कॅरियर में सफलता के लिए अधिक पुरुषार्थ करना पड़ता है।
(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)
 

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