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24 फरवरी, 2020|12:08|IST

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अच्‍छे नहीं होते कुंडली में शनि के यह योग

ज्‍योतिष की दृष्‍टि से शनि को बेहद क्रूर ग्रह माना जाता है। यदि व्‍यक्‍ति पर शनि की नजर टेढ़ी पड जाए तो फिर समस्‍याएं उसका पीछा नहीं छोड़ती। शनि की कुदृष्‍टि से व्‍यक्‍ति समस्‍याओं के जाल में उलझ जाता है। शनि की चाल बेहद धीमी होती है। ऐसे में शनि का प्रभाव व्‍यक्‍ति पर लंबे समय तक चलता है। व्‍यक्‍ति की जन्‍म कुंडली से शनि की स्‍थिति को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस पर कैसा प्रभाव होने वाला है। शनि का शुभ स्‍थान पर नहीं होना शनि दोष को पैदा करते हैं। ज्‍योतिष विज्ञान में कुंडली में कुल 12 भाव होते हैं। इन भावों से व्‍यक्‍ति के जीवन को अच्‍छे से समझा जा सकता है। इन भावों में शनि के शुभ और अशुभ स्‍थिति का पता लगाया जा सकता है। पं.शिवकुमार शर्मा के अनुसार जानिए शनि किस तरह से व्‍यक्‍ति को प्रभावित करता है।

  • ज्‍योतिष विज्ञान में कुंडली का चौथे भाव को सुख भाव कहते हैं। इस भाव में शनि को अच्‍छा नहीं माना जाता है। इस भाव में शनि की मौजूदगी से व्‍यक्‍ति के सुख नष्‍ट हो जाता है।
  • कुंडली में शनि का राहु और मंगल के साथ होने से दुर्घटना का योग बनता है। ऐसे लोगों को वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
  • शनि का सूर्य के साथ संबंध होने से कुंडली में दोष पैदा होता है। शनि के इस दोष से पिता-पुत्र के संबंध खराब रहते हैं। दोनों के बीच मतभेद रहता है। चूंकि शनि सूर्य देव के पुत्र हैं और दोनों के बीच शत्रुता का भाव है। शनि का वृश्चिक राशि या चंद्रमा से संबंध होने पर कुंडली में विष योग बनता है। विष योग के चलते व्‍यक्‍ति अपने कार्यक्षेत्र में सफल नहीं होता। शनि अगर अपनी नीच राशि मेष में हो तो भी जातक को इसके नकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। वह जिस काम में भी हाथ डालता है उसमें उसे उसके उलट परिणाम मिलते हैं।

(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

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  • Web Title:These totals of Saturn are not good