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पितृ पक्ष में ऐसे दिखे कौंआ तो आप पर है.....

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक का समय श्राद्ध या महालय पक्ष माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इस अवधि के 16  दिन पितरों अर्थात श्राद्ध कर्म के लिए नियत किए गए हैं। इसे पितृ पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। पितृ पक्ष में किए गए श्राद्ध कर्म से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष में पितर मृत्यु लोक से धरती पर आते हैं। श्राद्ध पक्ष का संबंध मृत्यु से माना गया है। इसलिए इन तिथियों में शुभ और मांगलिक कार्यों को त्यागकर पितरों के प्रति सम्मान और एकाग्रता रखते हैं।

श्राद्ध पक्ष में पितरों के अलावा ब्राह्राण,गाय, श्वान और कौए को भोजन खिलाने की परंपरा है। गाय में सभी देवी-देवताओं का वास होता है इसलिए गाय का महत्व है। वहीं पितर पक्ष में श्वान और कौए पितर का रूप होते हैं इसलिए उन्हें भोजन खिलाने का विधान है। पितृपक्ष के दौरान इनका खास ध्यान रखने की परंपरा है। कुछ ऐसे भी संकेत हैं जिनसे आप पता लगा सकते हैं कि आप पर पितरों का आशीर्वाद है या नहीं।

  • घर के पास यदि आपको कौए की चोंच में फूल-पत्ती दिखे तो तो मनोरथ की सिद्धि मिलती है।
  • कौआ गाय की पीठ पर चोंच को रगड़ता दिखे तो समझिए आपको उत्तम भोजन की प्राप्ति होगी।
  • कौआ अपनी चोंच में सूखा तिनका लाते दिखाई दे तो धन लाभ की उम्‍मीद बढ़ जाती है।
  •  कौआ अनाज के ढ़ेर पर बैठा मिले तो यह धन लाभ का संकेत है।
  • यदि कौआ बाईं तरफ से आकर भोजन ग्रहण करता है तो यात्रा बिना रुकावट के संपन्न होगी। अगर कौआ पीठ की तरफ से आए तो प्रवासी को लाभ मिलता है।
  •  कौआ मकान की छत पर या हरे-भरे वृक्ष पर जाकर बैठे तो अचानक धन लाभ होता है।

(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

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