
काशी में 5 दिन खुले रहेंगे स्वर्ण अन्नपूर्णा मंदिर के पट, धनतेरस से शुरू होंगे दर्शन
काशी में स्वर्ण अन्नपूर्णा देवी का मंदिर है जोकि साल भर में सिर्फ 5 दिन के लिए ही खुलता है। इस मंदिर के पट धनतेरस से खुल जाते हैं और इस दौरान श्रद्धालुओं को प्रसाद और सिक्के बांटे जाते हैं। जानें आखिर इस मंदिर की मान्यता क्या है?
उत्तर प्रदेश की नगरी काशी अपने आप में पवित्र और सबसे प्राचीन है। काशी को बनारस और वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है। इस जगह 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित है। वहीं काशी में कई और मंदिर हैं जिनकी मान्यता काफी है और कहा जाता है कि इनके दर्शन मात्र से ही जिंदगी में सुख-समृद्धि आती है। इन्हीं में से एक है स्वर्णमयी अन्नपूर्णा मंदिर। ये मंदिर साल भर में सिर्फ 5 दिन के लिए ही खुलता है, जिसकी शुरुआत आज यानी धनतेरस से होती है।

दक्षिण भारत से आते हैं श्रद्धालु
विगत तीन वर्षों से कुछ ऐसा संयोग बन रहा है कि परंपरानुसार चार के स्थान पर भक्तों को पांच दिन स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन का अवसर मिल रहा है। वहीं 2022 में दीपावली के दिन सूर्यग्रहण के कारण मात्र तीन दिन ही भक्तों को दर्शन मिला था। काशी में विराजमान स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन और उनके खजाने की लालसा लोगों को दीपपर्व पर भी घरों से सैकड़ों-हजारों किमी दूर काशी ले आती है। दक्षिण भारत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के खजाने की आस में दीपावली पर काशी पहुंचने लगे हैं। विगत पांच वर्षों में इस चलन ने विशेष रूप से जोर पकड़ा है।
स्वर्ण अन्नपूर्णा के दर्शन को लगी कतार
धनतेरस पर मां स्वर्णमयी अन्नपूर्णा की झलक पाने के लिए दूर-दराज के भक्त काशी पहुंचने लगे हैं। वे न सिर्फ काशी पहुंच चुके हैं बल्कि शुक्रवार की दोपहर से ही कतार में भी लग चुके हैं। यह बात दीगर है कि उन्हें स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन 18 अक्तूबर को भोर में 5 बजे से मिलेंगे। दर्शन 22 अक्तूबर तक होंगे। कतार में लगे भक्तों के लिए अन्नपूर्णा मंदिर की ओर से चाय, पानी और नाश्ते का प्रबंध किया गया। मंदिर के महंत गोस्वामी शंकर पुरी महाराज ने कहा है कि मेरी पहली प्राथमिकता जनसामान्य को सहज और सुलभ दर्शन कराना है। उसके हिसाब से सारी व्यवस्था हुई है।
माता अन्नपूर्णा की पुरी है काशी
भगवान शंकर से विवाह के उपरांत देवी पार्वती ने काशीपुरी में निवास की इच्छा जताई। महादेव उन्हें साथ लेकर अपने सनातन गृह अविमुक्त-क्षेत्र (काशी) आ गए। तब शिव-पार्वती के विमर्श से एक व्यवस्था दी गई। वह यह कि सतयुग, त्रेतायुग और द्वापर युग में काशी श्मशान रहेगी किंतु कलिकाल में यह अन्नपूर्णा की पुरी होकर बसेगी। इसी कारण वर्तमान में अन्नपूर्णा का मंदिर काशी का प्रधान देवीपीठ है।

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