
हनुमान जी के मंदिर में राम कीर्तन करते समय इन बातों का रखें ध्यान, जानिए पूजा से जुड़े नियम
हनुमान जी कलयुग के प्रत्यक्ष देवता हैं और उनका सबसे प्रिय भजन है – 'श्री राम'। मान्यता है कि मंदिर में जब भक्त 'जय श्री राम' या 'सीता राम' का कीर्तन करते हैं तो हनुमान जी स्वयं वहां उपस्थित हो जाते हैं। आइए जानते हैं राम कीर्तिन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम, जिन्हें हर भक्त को ध्यान रखना चाहिए।
Hanmaun Ji Puja Mangalwar Niyam: हनुमान जी कलयुग के प्रत्यक्ष देवता हैं और उनका सबसे प्रिय भजन है – 'श्री राम'। मान्यता है कि मंदिर में जब भक्त 'जय श्री राम' या 'सीता राम' का कीर्तन करते हैं तो हनुमान जी स्वयं वहां उपस्थित हो जाते हैं। लेकिन कीर्तन का फल तभी मिलता है जब वह पूर्ण श्रद्धा, शुद्धता और नियमों के साथ किया जाए। आइए जानते हैं राम कीर्तिन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम, जिन्हें हर भक्त को ध्यान रखना चाहिए।
कीर्तन से पहले शरीर और मन की शुद्धि
हनुमान जी और श्री राम दोनों ही पवित्रता को बहुत महत्व देते हैं। मंदिर जाने से पहले स्नान कर लें या कम से कम हाथ-पैर-मुंह धोकर शुद्ध हो जाएं। साफ-सुथरे और सात्विक वस्त्र (सफेद, पीला या लाल) पहनें। मन में कोई क्रोध, ईर्ष्या या नकारात्मक विचार नहीं आने दें। मंदिर में प्रवेश करते ही मन ही मन कहें – 'हे पवनसुत, हे सीता राम, मुझे शुद्ध करें।' यह छोटी सी तैयारी आपके कीर्तन को सौ गुना फलदायी बना देगी।
मंदिर परिसर में शांति और अनुशासन बनाए रखें
हनुमान मंदिर में कीर्तन के लिए हमेशा निर्धारित स्थान पर ही बैठें। अगर जगह ना हो तो पंक्तिबद्ध और व्यवस्थित होकर बैठें। जोर-जोर से बातें करना, मोबाइल बजाना या इधर-उधर देखना वर्जित है। कीर्तन के दौरान मंदिर की मूर्तियों, दीपक या अन्य पूजा सामग्री का पूरा सम्मान करें। स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और जूते बाहर ही उतारें और कीर्तन के बाद कचरा ना छोड़ें। यह अनुशासन हनुमान जी को अत्यंत प्रिय है।
कीर्तन से पहले श्री राम का ध्यान और भोग
कीर्तन शुरू करने से पहले श्री राम की छोटी सी प्रतिमा या फोटो को सामने रखें। उन्हें फूल, चंदन, माला अर्पित करें और एक दीपक जलाएं। थोड़ा सा मिष्टान्न या फल का भोग लगाएं। फिर 'जय जय श्री राम' या 'श्री राम जय राम जय जय राम' बोलकर कीर्तन प्रारंभ करें। हनुमान जी राम नाम की शुद्ध ध्वनि सुनकर तुरंत प्रसन्न होते हैं।
कीर्तन का सही समय और भाव
सबसे उत्तम समय मंगलवार और शनिवार की संध्या या ब्रह्म मुहूर्त होता है। कीर्तन कम से कम 21, 51 या 108 बार 'श्री राम जय राम जय जय राम' का करें। बीच-बीच में हनुमान चालीसा या 'श्री राम तारक मंत्र' का पाठ भी जोड़ें। सबसे महत्वपूर्ण – कीर्तन पूरी श्रद्धा और प्रेम से करें, किसी को दिखाने के लिए नहीं। मन में भाव हो कि 'हे हनुमान जी, आप स्वयं यहां विराजमान हैं और मेरे साथ गा रहे हैं।'
ये 4 नियम पालने से हनुमान जी का आशीर्वाद तुरंत मिलता है। कीर्तन समाप्ति के बाद प्रसाद बांटें और सबको 'जय श्री राम – जय हनुमान' बोलकर विदा करें। ऐसा करने से घर-परिवार के सारे संकट, रोग, कर्ज और कलह दूर हो जाते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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