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जीवन में खुशियां भर देता है यह व्रत

जीवन में खुशियां भर देता है यह व्रत

दूसरों की निंदा, झूठ, छल ऐसे पाप हैं जिनके कारण नर्क में जाना पड़ता है। ज्येष्ठ मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी, अपरा एकादशी ऐसी एकादशी है जिसका व्रत रखने से ऐसे पापों से मुक्ति मिल जाती है। अपरा एकादशी को अचला एकादशी नाम से भी जाना जाता है।

इस दिन भगवान विष्णु एवं उनके पांचवें अवतार वामन ऋषि की पूजा की जाती है। अपरा एकादशी व्रत से अपार खुशियों की प्राप्ति होती है। इस एकादशी पर विष्णुसहस्रनाम का पाठ करना चाहिए। इस दिन श्री हरि की आराधना से कीर्ति, यश, धन की वृद्धि होती है। एकादशी के दिन खाना नहीं खाना चाहिए। पूरे दिन निर्जल उपवास रखना चाहिए। जो लोग व्रत नहीं रखते हैं उन्हें भी झूठ और परनिंदा से बचना चाहिए।  

कथा 
प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा थे। उनका छोटा भाई वज्रध्वज क्रूर और अधर्मी था। वह बड़े भाई से द्वेष रखता था। एक दिन उसने बड़े भाई की हत्या कर उनकी देह को पीपल के नीचे दफना दिया। अकाल मृत्यु के कारण राजा प्रेत के रूप में उसी पीपल पर रहने लगा और उत्पात करने लगा। एक दिन धौम्य ऋषि इधर से गुजरे तो उन्होंने प्रेत को देखा। अपने तपोबल से उसके अतीत को जान लिया। ऋषि ने प्रेत को परलोक विद्या का उपदेश दिया और अपरा एकादशी का व्रत रखा। उसका पुण्य प्रेत को अर्पित कर दिया। इस पुण्य के प्रभाव से राजा को मुक्ति मिल गई। वह ऋषि को धन्यवाद देता हुआ स्वर्ग चला गया। 

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैंजिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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