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Nirjala Ekadashi 2024: निर्जला एकादशी पर 3 शुभ योग, नोट करें मुहूर्त, पूजाविधि, कथा, व्रत पारण टाइम

  • Nirjala Ekadashi 2024 : निर्जला एकादशी पर 3 शुभ योग के संयोग से भक्तों को विष्णु भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से भीम को मोक्ष और लंबी आयु का वरदान मिला था।

Shrishti Chaubey नई दिल्ली,लाइव हिन्दुस्तान टीमTue, 18 June 2024 05:47 AM
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Nirjala Ekadashi 2024 : 2024 की सबसे कठिन और अनंत पुण्य फल देने वाली निर्जला एकादशी का व्रत इस बार 18 जून को पड़ रहा है। इस दिन पूरे विधि-विधान से भगवान विष्णु की उपासनाकी जाएगी। इस साल निर्जला एकादशी पर 3 शुभ योग के संयोग सेभक्तों को विष्णु भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होगी। मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत रखने से जातक की सभी मनोकामनाएंपूर्ण हो सकती हैं।आइए जानते हैं निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि,मंत्रऔर व्रत पारण का समय-

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कब है निर्जला एकादशी?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी की तिथि 17 जून को सुबह 4 बजकर 43 मिनट से शुरू हो जाएगी और अगले दिन 18 जून को सुबह 6 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के चलते 18 जून, मंगलवार को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

शुभ संयोग में निर्जला एकादशी

ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा ने बताया कि इस बार निर्जला एकादशी पर तीन मंगलकारी संयोग बन रहे रहे हैं। इस दिन त्रिपुष्कर योग, शिव योग और स्वाति नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। यह संयोग समृद्धि में वृद्धि के कारक माने जाते हैं।

निर्जला एकादशी शुभ मुहूर्त

निर्जला एकादशी तिथि प्रारम्भ - जून 17, 2024 को 04:43 ए एम बजे

निर्जला एकादशी तिथि समाप्त - जून 18, 2024 को 06:24 ए एम बजे

19 जून को, पारण (व्रत तोड़ने का)समय - 05:24 ए एम से 07:28 ए एम

पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - 07:28 ए एम

निर्जला एकादशी पूजा-विधि

  • स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें
  • भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें
  • प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
  • अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
  • मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
  • संभव हो तो व्रत रखें और व्रत लेने का संकल्प करें
  • निर्जलाएकादशी की व्रत कथा का पाठ करें
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें
  • पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें
  • प्रभु को तुलसी सहित भोग लगाएं
  • अंत में क्षमा प्रार्थना करें

मंत्र- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय,ॐ विष्णवे नम:

निर्जला एकादशी महत्व

मान्यता है पांडव भाइयों में से भीम ने ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को बगैर जल ग्रहण किए एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत को करने के कारण भीम को मोक्ष और लंबी आयु का वरदान प्राप्त हुआ था। निर्जला एकादशी को एकादशी व्रतों में विशेष माना जाता है और इसे साल भर की सभी एकादशी व्रत के बराकर माना जाता है।

 

 

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