सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव को चढ़ाएं ये 11 चीजें, भोलेनाथ करेंगे कृपा, बनने लगेंगे बिगड़े काम

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Somwati Amavasya Ke Upay: हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान शंकर की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से की गई पूजा से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की परेशानियां कम होती हैं।

Somwati Amavasya Ke Upay:

इस साल सोमवती अमावस्या 15 जून 2026, सोमवार को पड़ रही है। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से शुरू होगी और 15 जून को सुबह 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 15 जून को ही सोमवती अमावस्या मानी जाएगी। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

सोमवार और अमावस्या का संयोग होने की वजह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं। कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और पितरों की शांति के लिए तर्पण भी करते हैं।

रुद्राभिषेक और शिव पूजा का रहता है महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से की गई पूजा से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की परेशानियां कम होती हैं।

यही वजह है कि इस दिन लोग सुबह स्नान करने के बाद शिव मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं। कई जगहों पर विशेष रुद्राभिषेक और पूजा कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

जल और दूध से करें अभिषेक

शिव पूजा में सबसे पहले शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद कच्चे दूध से अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इससे मन को शांति मिलती है और सकारात्मकता बढ़ती है।

बेलपत्र चढ़ाना माना जाता है शुभ

भगवान शिव को बेलपत्र बेहद प्रिय माना जाता है। पूजा के दौरान तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है। श्रद्धालु मानते हैं कि इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।

भांग और धतूरा भी किया जाता है अर्पित

शिव पूजा में भांग और धतूरा चढ़ाने की परंपरा भी काफी पुरानी है। कई भक्त सोमवती अमावस्या के दिन पूजा के दौरान इन्हें शिवलिंग पर अर्पित करते हैं।

शहद, चंदन और पंचामृत का भी महत्व

पूजा में शहद, चंदन और पंचामृत का भी इस्तेमाल किया जाता है। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार किया जाता है। इसके अलावा चंदन अर्पित करने की भी परंपरा है।

काले तिल और अक्षत भी करें अर्पित

अमावस्या तिथि पितरों से जुड़ी मानी जाती है। इसलिए कई लोग पूजा के दौरान काले तिल अर्पित करते हैं। इसके साथ ही अक्षत यानी साबुत चावल भी चढ़ाए जाते हैं।

मौसमी फल चढ़ाने की भी परंपरा

पूजा में मौसमी फल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार फल, प्रसाद और अन्य पूजा सामग्री भगवान शिव को अर्पित करते हैं।

सुबह का समय माना जाता है शुभ

सोमवती अमावस्या पर सुबह स्नान के बाद पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दिन कई लोग शिव मंदिर जाकर जलाभिषेक करते हैं, जबकि कुछ लोग घर में ही भगवान शिव की पूजा करते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

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योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


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न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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