सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: श्रापित चंद्रदेव के तप से पिघले थे महादेव, फिर दिया ये वरदान

Jul 10, 2025 11:03 pm ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Somnath Jyotirlinga: गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का खास महत्व है। इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से कई फल प्राप्त होते हैं। चलिए जानते हैं इसकी कहानी और महत्व के बारे में…

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: श्रापित चंद्रदेव के तप से पिघले थे महादेव, फिर दिया ये वरदान

Somnath Jyotirlinga Story In Hindi: हिंदू धर्म के पुराणों के अनुसार भगवान शिव कुल 12 जगहों पर स्वंय प्रकट हुए हैं। इन जगहों पर मौजूद हर एक शिवलिंग को ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। सनातन धर्म में ज्योतिर्लिंग के दर्शन का खूब महत्व है। हमारे देश में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं। 12 ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ सबसे पहले आता है। कहा जाता है कि भगवान शिव का ये पहला मंदिर है। यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में है। समुद्र किनारे स्थित इस मंदिर का खास महत्त है। चलिए जानते हैं कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी और मान्यता के बारे में…

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी

शिव महापुराण और श्रीमद्भगवद्गीता समेत कई पुराणों में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के महत्व को बताया गया है। बता दें कि एक बार दक्ष प्रजापति ने चंद्रदेव को क्षय रोग का श्राप दिया था। उनके श्राप के बाद चंद्रदेव क्षयग्रस्त हो गए। तब ब्रह्माजी के कहने पर चंद्रदेव ने कठोर तप किया ताकि शिवजी को प्रसन्न किया जा सके। चंद्रदेव ने तप के दौरान एक भी चूक ना होने दी। उन्होंने 10 करोड़ बार महामृत्युजंय मंत्र का जाप किया। शिवजी चंद्रदेव के इस तप से प्रसन्न हुए और उन्हें मुक्ति प्रदान करते हुए वरदान दिया। इसके बाद भगवान शिव को ही सोमनाथ (चंद्रमा के स्वामी) कहा गया। यहां पर सोम का अर्थ है चंद्रमा और नाथ का मतलब है स्वामी। चंद्रदेव की प्रार्थना पर शिवजी वहीं पर उनके द्वारा बनाए गए शिवलिंग में मां पार्वती संग विराजमान हो गए। ठीक इसी जगह पर ही सोमनाथ ज्योतिर्लिंग है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

शिवजी ने चंद्रदेव को दिया ये वरदान

अब विस्तार से पूरा किस्सा समझते है। जब चंद्रदेव की कड़ी तपस्या से शिवजी प्रसन्न हुए, तब उन्हें अमर होने का वरदान दे डाला था। हालांकि शिवजी ने ये भी कहा कि वह दक्ष प्रजापति के वचनों की भी रक्षा करेंगे। उन्होंने चंद्रदेव से कहा कि कृष्ण पक्ष में एक-एक करके तुम्हारी कला क्षीण होती जाएगी लेकिन शुक्ल पक्ष में वापस से ये कला धीरे-धीरे वापस आ जाएगी। पूर्णिमा वाले दिन तुम पूरे हो जाओगे।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी

चंद्रदेव को क्यों मिला था श्राप?

दरअसल दक्ष प्रजापति की कुल 27 पुत्रियां थीं। उन्होंने अपनी 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रदेव के साथ कर दिया। दक्ष प्रजापति की 27 पुत्रियों में से रोहिणी के प्रति चंद्रदेव का समर्पण और स्नेह दिखा। चंद्रदेव के ऐसा करने से दक्ष प्रजापति की सारी पुत्रियों को अपमानित महसूस हुआ। इन लोगों ने अपने पिता से चंद्रदेव की शिकायत की। इसके बाद गुस्से में आकर दक्ष प्रजापति ने चंद्रदेव को क्षय रोग का श्राप दिया था। उन्होंने चंद्रदेव की एक भी ना सुनी और कहा कि अबसे धीरे-धीरे तुम्हारा तेज खत्म कमजोर पड़ता जाएगा।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व

मान्यता है कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से लोगों का चंद्र दोष खत्म हो जाता है। यहां आने वाले हर व्यक्ति पर भगवान शिव के साथ-साथ चंद्रदेव की भी कृपा बरसती है। इस ज्योतिर्लिंग में पूजा अर्चना करने से मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को धन-धान्य की कमी कभी भी नहीं रहती है। मान्यता तो ऐसी भी है कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद व्यक्ति के सारे पाप मिट जाते हैं और उसे मोक्ष मिल जाता है।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

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गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।


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गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।


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गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।


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गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।


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गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।


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