Som Pradosh Vrat 2026: बन रहे हैं ये 3 शुभ योग, नोट करें पूजा का शुभ मुहूर्त, करें भगवान शिव के 108 नामों का जाप
आज 16 मार्च को सोम प्रदोष व्रत है। इस खास दिन पर भगवान शिव की आराधना की जाती है। नीचे विस्तार से जानें कि आज का ये व्रत और भी खास क्यों हो गया है? साथ ही नोट करें आज की पूजा के शुभ मुहूर्त के साथ-साथ पूजा की आसान सी विधि…

Som Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में कई ऐसे व्रत हैं जोकि भगवान शिव को समर्पित होते हैं। इनमें से एक है प्रदोष व्रत। सनातन धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाए और व्रत रखा जाए तो जिंदगी से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस व्रत की खास बात ये है कि ये जिस दिन पड़ता है, उसका नाम उसी हिसाब से होता है। आज सोमवार है और तो आज इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। सोमवार का दिन भगवान शिव के नाम होता है। ऐसे में सोम प्रदोष का महत्व और भी बढ़ जाता है। बता दें कि ये व्रत हर महीने में दो बार आता है। महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत होता है। नीचे विस्तार से जानेंगे कि आज के लिए प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? साथ ही जानेंगे इस व्रत की पूजा की आसान सी विधि को।
प्रदोष व्रत पर बन रहे ये योग
आज का दिन बहुत ही अच्छा माना जा रहा है क्योंकि आज एक नहीं दो नहीं बल्कि कई शुभ योग बन रहे हैं। हिंदू पंचांग के हिसाब से आज शिव योग है। इसी के साथ सिद्ध और शुक्रादित्य योग भी आज बन रहे हैं। माना जाता है कि इन योगों में की पूजा का लाभ जरूर मिलता है। इस
पूजा का शुभ मुहूर्त
चैत्र का महीना हर मायने में खास होता है। हालांकि खरमास शुरु हो चुके हैं लेकिन इसी महीने में कई ऐसी चीजें होती हैं जिनका महत्व है। इसी महीने में चैत्र नवरात्रि शुरू होती है। साथ ही इसी दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। इसके अलावा गुड़ी पड़वा का त्योहार भी मनाया जाता है। बात की जाए आज प्रदोष व्रत की पूजा की तो इसके लिए शाम का समय सबसे सही माना जाता है। इस दौरान पूजा का शुभ मुहूर्त 6:48 बजे से लेकर 9:12 बजे तक है।
त्रयोदिशी तिथि की शुरुआत
पंचांग के हिसाब से इस बार सोम प्रदोष व्रत पर द्धादशी और त्रयोदिशी तिथि का संयोग बन रहा है। आज सुबह त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 9:40 बजे से लेकर कल यानी 17 मार्च को 9:23 बजे तक रहने वाली है।
प्रदोष व्रत की पूजा
1. सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
2. शुभ मुहूर्त के दौरान पूजा घर में शिवजी की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर रख दें।
3. धूपबत्ती और दीया जलाकर पूजा की शुरुआत करें।
4. शिवलिंग का जलाभिषेक करें। बेलपत्र और धतूरा अर्तिप करें। इसके अलावा शिवलिंग का गंगाजल, दूध, घी, दही और शहद से अभिषेक करें।
5. भोग लगाने के बाद शिव चालीसा का पाठ करें। आज के दिन प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें।
6. सबसे आखिरी में ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें। भगवान शिव के 108 नामों का जाप भी फलदायी होगा। बाद में भूल-चुक के लिए भगवान शिव से माफी मांग लें।
भगवान शिव के 108 नाम
ॐ महाकाल नमः
ॐ रुद्रनाथ नमः
ॐ भीमशंकर नमः
ॐ नटराज नमः
ॐ प्रलेयन्कार नमः
ॐ भीमेश्वर नमः
ॐ विषधारी नमः
ॐ बम भोले नमः
ॐ ओंकार स्वामी नमः
ॐ ओंकारेश्वर नमः
ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः
ॐ भोले बाबा नमः
ॐ शिवजी नमः
ॐ चंद्रमोली नमः
ॐ डमरूधारी नमः
ॐ चंद्रधारी नमः
ॐ दक्षेश्वर नमः
ॐ घ्रेनश्वर नमः
ॐ मणिमहेश नमः
ॐ अनादी नमः
ॐ अमर नमः
ॐ आशुतोष महाराज नमः
ॐ विश्वनाथ नमः
ॐ अनादिदेव नमः
ॐ उमापति नमः
ॐ गोरापति नमः
ॐ गणपिता नमः
ॐ विलवकेश्वर नमः
ॐ भोलेनाथ नमः
ॐ कैलाश पति नमः
ॐ भूतनाथ नमः
ॐ नंदराज नमः
ॐ नन्दी की सवारी नमः
ॐ ज्योतिलिंग नमः
ॐ मलिकार्जुन नमः
ॐ शम्भु नमः
ॐ नीलकंठ नमः
ॐ महाकालेश्वर नमः
ॐ त्रिपुरारी नमः
ॐ त्रिलोकनाथ नमः
ॐ त्रिनेत्रधारी नमः
ॐ बर्फानी बाबा नमः
ॐ लंकेश्वर नमः
ॐ अमरनाथ नमः
ॐ केदारनाथ नमः
ॐ मंगलेश्वर नमः
ॐ अर्धनारीश्वर नमः
ॐ नागार्जुन नमः
ॐ जटाधारी नमः
ॐ नीलेश्वर नमः
ॐ जगतपिता नमः
ॐ मृत्युन्जन नमः
ॐ नागधारी नमः
ॐ रामेश्वर नमः
ॐ गलसर्पमाला नमः
ॐ दीनानाथ नमः
ॐ सोमनाथ नमः
ॐ जोगी नमः
ॐ भंडारी बाबा नमः
ॐ बमलेहरी नमः
ॐ गोरीशंकर नमः
ॐ शिवाकांत नमः
ॐ महेश्वराए नमः
ॐ महेश नमः
ॐ संकटहारी नमः
ॐ महेश्वर नमः
ॐ रुंडमालाधारी नमः
ॐ जगपालनकर्ता नमः
ॐ पशुपति नमः
ॐ संगमेश्वर नमः
ॐ अचलेश्वर नमः
ॐ ओलोकानाथ नमः
ॐ आदिनाथ न
ॐ देवदेवेश्वर नमः
ॐ प्राणनाथ नमः
ॐ शिवम् नमः
ॐ महादानी नमः
ॐ शिवदानी नमः
ॐ अभयंकर नमः
ॐ पातालेश्वर नमः
ॐ धूधेश्वर नमः
ॐ सर्पधारी नमः
ॐ त्रिलोकिनरेश नमः
ॐ हठ योगी नमः
ॐ विश्लेश्वर नमः
ॐ नागाधिराज नमः
ॐ सर्वेश्वर नमः
ॐ उमाकांत नमः
ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः
ॐ त्रिकालदर्शी नमः
ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः
ॐ गिरजापति नमः
ॐ भद्रेश्वर नमः
ॐ त्रिपुनाशक नमः
ॐ निर्जेश्वर नमः
ॐ किरातेश्वर नमः
ॐ जागेश्वर नमः
ॐ अबधूतपति नमः
ॐ भीलपति नमः
ॐ जितनाथ नमः
ॐ वृषेश्वर नमः
ॐ भूतेश्वर नमः
ॐ बैजूनाथ नमः
ॐ नागेश्वर नम
ॐ महादेव नमः
ॐ गढ़शंकर नमः
ॐ मुक्तेश्वर नमः
ॐ नटेषर नमः
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता
वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल
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