2026 में कब लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण? जानें डेट, टाइम और भारत में दिखेगा या नहीं

Feb 08, 2026 10:51 am ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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सूर्य और चंद्र ग्रहण का विशेष महत्व होता है। विज्ञान के हिसाब से सूर्य और चंद्र ग्रहण आसमान में होने वाली सामान्य खगोलीय घटनाएं हैं, जो सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की पोजिशन बदलने से होती हैं। हिंदू परंपरा में ग्रहण के समय सूतक टाइम माना जाता है, जिसमें पूजा-पाठ और शुभ कामों से दूरी रखने की परंपरा है।

2026 में कब लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण? जानें डेट, टाइम और भारत में दिखेगा या नहीं

Solar & Lunar Eclipse 2026: Kab lagega Surya-Chandra Grahan- सूर्य और चंद्र ग्रहण का विशेष महत्व होता है। विज्ञान के हिसाब से सूर्य और चंद्र ग्रहण आसमान में होने वाली सामान्य खगोलीय घटनाएं हैं, जो सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की पोज़िशन बदलने से होती हैं। सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और कुछ समय के लिए सूर्य की रोशनी ढक जाती है। वहीं चंद्र ग्रहण तब पड़ता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर अपनी छाया चंद्रमा पर डाल देती है। धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण को राहु-केतु से जोड़कर देखा जाता है। हिंदू परंपरा में ग्रहण के समय सूतक टाइम माना जाता है, जिसमें पूजा-पाठ और शुभ कामों से दूरी रखने की परंपरा है। ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान और पूजा करना शुभ माना जाता है।

साल 2026 में कुल चार ग्रहण पड़ेंगे- दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण। चलिए एक-एक करके जानते हैं कब कौन सा ग्रहण लगेगा और भारत में दिखेगा या नहीं।

17 फरवरी 2026: साल का पहला सूर्य ग्रहण

2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को पड़ेगा। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा। इस तरह के ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को पूरा ढक नहीं पाता और सूर्य के चारों ओर एक चमकदार रिंग नजर आती है।

भारत में दिखेगा या नहीं?- यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

सूतक लगेगा?- यह ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए यहां परंपरा के हिसाब से सूतक काल मान्य नहीं होगा।

सावधानी: जहां सूर्य ग्रहण दिखता है, वहां इसे नंगी आंखों से देखना आंखों के लिए नुकसानदेह होता है। हमेशा सेफ्टी ग्लास या फिल्टर का इस्तेमाल करना चाहिए।

3 मार्च 2026: साल का पहला चंद्र ग्रहण

साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगेगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) होगा। इस दौरान चंद्रमा कुछ समय के लिए लाल-सा नजर आ सकता है, जिसे आम बोलचाल में ब्लड मून कहा जाता है।

भारत में दिखेगा या नहीं?- यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। भारत में चंद्रमा के उदय के बाद ग्रहण का आखिरी हिस्सा साफ नजर आएगा।

भारत में टाइम: भारत में ग्रहण का दिखने वाला समय शाम करीब 5:59 बजे से 6:47 बजे के आसपास रहेगा।

सूतक टाइम कब से?- चंद्र ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक टाइम माना जाता है। ऐसे में 3 मार्च की सुबह करीब 6:20 बजे से सूतक टाइम शुरू माना जाएगा और ग्रहण खत्म होने तक रहेगा।

12 अगस्त 2026: साल का दूसरा सूर्य ग्रहण-

2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को पड़ेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा। कुछ देशों में दिन में कुछ देर के लिए अंधेरा-सा हो जाएगा।

भारत में दिखेगा या नहीं?- यह सूर्य ग्रहण भी भारत में नहीं दिखेगा।

सूतक काल: भारत में दिखाई न देने की वजह से सूतक टाइम लागू नहीं माना जाएगा।

27–28 अगस्त 2026: साल का दूसरा चंद्र ग्रहण

साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 27–28 अगस्त की रात को लगेगा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) होगा।

भारत में दिखेगा या नहीं?- भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।

सूतक टाइम: भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।

2026 के सभी ग्रहण एक नजर में

17 फरवरी 2026: सूर्य ग्रहण – भारत में नहीं दिखेगा

3 मार्च 2026: चंद्र ग्रहण – भारत में दिखेगा

12 अगस्त 2026: सूर्य ग्रहण – भारत में नहीं दिखेगा

27–28 अगस्त 2026: चंद्र ग्रहण – भारत में नहीं दिखेगा

ग्रहण के दौरान क्या करें, क्या न करें?

चंद्र ग्रहण देखना सुरक्षित माना जाता है।

सूर्य ग्रहण को बिना प्रोटेक्शन देखना आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है।

सूतक टाइम मानने वाले लोग इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ काम नहीं करते।

ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान और पूजा करना परंपरा में शुभ माना जाता है।

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लेखक के बारे में

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योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


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योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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