Solar Eclipse 2026 daan: क्या भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, सूतक कितने समय पहले लगता है, क्या दान करें

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Solar Eclipse 2026 Visibility: कल लगने वाला सूर्य ग्रहण क्या भारत में दिखाई देगा, क्या इसका सूतक काल मान्य होगा, इससे जुड़े आपके मन में भी सवाल हैं तो आप यहां जान सकते हैं।

Solar Eclipse Timing 2026, 12 अगस्त को लगने वाले सूर्यग्रहण
12 अगस्त को लगने वाले सूर्यग्रहण

बुधवार 12 अगस्त को लगने वाले सूर्यग्रहण को लेकर लोगों के मन में सवाल हैं। कुल लोगों को इसके सूतक काल, इस दिन अमावस्या पूजन को लेकर जानना चाहते हैं, तो कुछ जानना चहते हैं कि इस दिन ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचने के लिए क्या करना चाहिए, क्या दान करना चाहिए, ये जानना चाहते हैं। आइए जानें ग्रहण कब लग रहा है, कहां दिख रहा है और सूतक ताल क्या रहेगा।

इस दिन क्या दान करें

हिंदु परंपरा के अनुसार कहा जाता है कि सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण के बाद दान अवश्य करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इससे ग्रहण का कुछ असर कम होता है, इससे शांति आती है। आइए जानें इस दिन क्या दान करना चाहिए। इस दिन सूर्य का आशीर्वाद पाने के लिए गेहूं का दान करना चाहिए, इससे लाइफ में स्टेबिलिटी, कॉन्फिडेंस और सम्मान मिलता है, इसके अलावा गुड़, तांबे की चीज का दान करना चाहिए। इस दिन लाल कपड़े का दिन करना चाहिए, हेल्थ को अच्छा करना चाहते हैं तांबे का बर्तन दान कर सकते हैं। इसके अलावा गरीबों को खाने और पानी का दान कर सकते हैं।

सूर्य ग्रहण का कहां दिखेगा

आपको बता दें कि सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, लेकिन अमेरिका के कुछ शहरों और यूरोप, स्पेन, आइसलेंड, ग्रीनलेंड में ग्रहण पूर्णदिखेगा। लोगों इसे देखने के लिए उत्सुक हैं। 12 अगस्त की रात 9.04 बजे से रात 11 बजकर 16 मिनट पर ग्रहण खत्म होगा। 13 अगस्त की सुबह 1 बजकर 28 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। पुर्तगाल के कुछ हिस्से,उत्तरी रूस, आंशिक रूप से उत्तरी अमेरिका के उत्तर पूर्वी हिस्से अधिकांश यूरोप और उत्तर-पश्चिम अफ्रीका में नजर आएगा। रात में होने के कारण यह भारत में नजर नहीं आएगा।

सूर्य ग्रहण का सूतक कितने समय पहले लगता है?

आपको बता दें कि सूतक काल ग्रहण से लगने से पहले वाला समय होता है, सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण का सूतक काल अलग-अलग होता है। सूर्य ग्रहण का 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण का 9 घंटे पहले लगता है। ये यह सूर्य ग्रहण है तो इसका सूतक रात 9 बजे से पहले हो जाएगा। लेकिन भारत में यह ग्रहण नहीं दिख रहा है। इसलिए इस ग्रहण का कोई सूतक काल नहीं माना जाएगा।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


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