सिंह और धनु राशि वालों को शनि ढैय्या से कब मिलेगी राहत? जानें पूरा समय और असर

Apr 06, 2026 09:03 am ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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ज्योतिषशास्त्र में शनि को विशेष स्थान प्राप्त है। शनि के अशुभ प्रभावों से हर कोई भयभीत रहता है। हर व्यक्ति पर शनि की ढैय्या का असर भी जीवन में एक न एक बार जरूर पड़ता है। शनि की ढैय्या ढ़ाई साल तक चलती है। इस दौरान व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

सिंह और धनु राशि वालों को शनि ढैय्या से कब मिलेगी राहत?  जानें पूरा समय और असर

ज्योतिषशास्त्र में शनि को विशेष स्थान प्राप्त है। शनि के अशुभ प्रभावों से हर कोई भयभीत रहता है। हर व्यक्ति पर शनि की ढैय्या का असर भी जीवन में एक न एक बार जरूर पड़ता है। शनि की ढैय्या ढ़ाई साल तक चलती है। इस दौरान व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस समय सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है और इससे मुक्ति मिलने में अभी काफी समय है।

कब शुरू हुई ढैय्या

सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैय्या 29 मार्च 2025 से शुरू हुई थी। तब से लेकर अब तक इसका असर अलग-अलग रूप में दिख रहा है। कई लोगों को काम में देरी, योजनाओं का अटकना या मन का थोड़ा परेशान रहना जैसी स्थिति महसूस हो सकती है। साल 2026 में भी यही स्थिति बनी रहने के संकेत हैं।

2027 में क्या बदलेगा- बीच में एक ऐसा समय आएगा, जब हालात थोड़े बेहतर लगेंगे। 3 जून 2027 को शनि जब मेष राशि में जाएंगे, तब ढैय्या का असर कुछ समय के लिए कम होगा। इस दौरान अटके काम आगे बढ़ सकते हैं, फैसले लेना थोड़ा आसान लग सकता है और मन भी पहले से हल्का महसूस हो सकता है। लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी। इसलिए इसे स्थायी सुधार नहीं माना जा रहा है।

फिर क्यों लौटेगी परेशानी- इसके बाद 20 अक्टूबर 2027 को शनि फिर से मीन राशि में लौटेंगे। यहीं से ढैय्या का असर दोबारा शुरू होगा। यह दौर 23 फरवरी 2028 तक चलेगा। यानी बीच में मिली राहत के बाद एक बार फिर वही सतर्कता रखनी होगी।

कब मिलेगा पूरा आराम- ज्योतिष के हिसाब से 23 फरवरी 2028 के बाद स्थिति बदल जाएगी। जब शनि दोबारा मेष राशि में जाएंगे, तब सिंह और धनु राशि वालों को ढैय्या से पूरी राहत मिल जाएगी। इसके बाद धीरे-धीरे कामकाज में स्थिरता आने लगेगी और चीजें अपने ट्रैक पर लौटती दिखेंगी।

इस समय क्या रखें ध्यान- ढैय्या के समय सबसे ज्यादा जरूरी होता है धैर्य। जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। कई बार बिना सोचे लिया गया निर्णय बाद में परेशानी बढ़ा सकता है। खर्चों पर कंट्रोल रखना भी जरूरी है। जहां जरूरी हो, वहीं खर्च करें। साथ ही काम में लगातार मेहनत करते रहना ही इस समय सबसे बेहतर तरीका माना जाता है।

उपाय- पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, शनि के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपाय किए जाते हैं-

  • शनिवार के दिन शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाना।
  • हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करना।
  • गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करना।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

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व्यक्तिगत रुचियां


काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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