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Shukra Pradosh Vrat Katha: शिव-पार्वती की पूजा के बाद जरूर करें शुक्र प्रदोष व्रत कथा का पाठ, पूरी होगी हर मनोकामना

Shukra Pradosh Vrat Katha: शिव-पार्वती की पूजा के बाद जरूर करें शुक्र प्रदोष व्रत कथा का पाठ, पूरी होगी हर मनोकामना

संक्षेप:

Shukra Pradosh Vrat Katha Hindi: साल 2026 में जनवरी महीने का तीसरा प्रदोष व्रत आज रखा जा रहा है। माना जाता है कि ये व्रथ प्रदोष व्रत कथा के पाठ किए बिना अधूरी ही होती है।

Jan 30, 2026 10:08 am ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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आज जनवरी के महीने का तीसरा प्रदोष व्रत है। ये व्रत महीने में 2 बार आता है लेकिन इस साल जनवरी में ये तीन बार आया है। बता दें कि हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को ही इस व्रत को रखा जाता है। खास तौर पर इस दिन भगवान शिव की पूजा होती है। भगवान शिव के साथ-साथ मां पार्वती को भी पूजा जाता है। मान्यता के हिसाब से इस दिन व्रत रखा जाए और पूजा की जाए को शिवशक्ति हर मनोकामना पूरी करते हैं। आज प्रदोष व्रत पर कथा पढ़ने का भी बहुत महत्व होता है और साथ ही पूजा के बाद शिव चालीसा भी पढ़ी जाती है। दोनों आपको यहां नीचे एक ही साथ मिल जाएंगे।

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आज पढ़ें प्रदोष व्रत की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार एक नगर में एक ब्राह्मण महिला निवास करती थी। पति के देहांत के बाद इस दुनिया में उसका कोई भी सहारा नहीं बचा था। अपने छोटे बेटे के साथ भिक्षा मांगकर वो किसी तरह जिंदगी जी रही थी। एक बार वह ऐसे ही भिक्षा लेकर वापस घर आ रही थी तो रास्ते में एक घायल लड़के को देखा। उसे देखकर वो ब्राह्मणी करूणा से भर जाती है। उसे दया आती है और वो उसे अपने घर ले आती है और उसकी सेवा में जुट जाती है। वो लड़का कोई और नहीं बल्कि विदर्भ राज्य का राजकुमार था। दुश्मनों ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बंदी बना लिया था और राज्य पर अपना अधिकार जमा लिया था। इसी वजह से वो ऐसे ही भटक रहा था। स्वस्थ होने के बाद राजकुमार ब्राह्मणी और उसके बेटे के साथ ही रहने लगा। एक दिन अंशुमति नाम की एक गंधर्व कन्या की दृष्टि राजकुमार पर पड़ती है और वह आकर्षित हो जाती है। इसके ठीक अगले दिन वह अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाने ले आई। उसके माता-पिता को राजकुमार बेटी की शादी के योग्य लगा। कुछ समय बाद कन्या के माता-पिता के सपने में भगवान शिव आए और उन्होंने आदेश दिया कि उनकी बेटी और राजकुमार की शादी करवा दी जाए। भगवान की आज्ञा पर वो लोग अपनी बेटी की शादी राजकुमार से जल्द ही करवा देते हैं। इधर ब्राह्मणी नियमित रूप से प्रदोष व्रत रखती थी और सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा किया करती थी। इसी वजह से अंशुमति के पिता की सेना की मदद से राजकुमार ने शत्रुओं को पराजित कर विदर्भ राज्य को फिर से प्राप्त किया और अपने पिता के साथ रहने लगा। बाद में उसने ब्राह्मणी के पुत्र को अपने राज्य का प्रधानमंत्री बना दिया था। इसी वजह से माना जाता है कि प्रदोष व्रत की मदद से जिस तरह से ब्राह्मणी की जिंदगी की परिस्थिति बदली, उसी तरह ही भगवान शिव अपने हर सच्चे भक्त के कष्ट दूर करके वरदान देते हैं।

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शिव चालीसा

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव…॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव…॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव…॥ अक्षमाला बनमाला मुण्डमाला धारी। चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ ॐ जय शिव…॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव…॥ कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता। जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव…॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव…॥ काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी। नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव…॥ त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव…॥ जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा| ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥

Garima Singh

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शॉर्ट बायो


गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।


परिचय और अनुभव

गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।


करियर

गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।


एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच

गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।


व्यक्तिगत रुचियां

काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।


विशेषज्ञता

वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल

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