Shri Somnath Mandir: 12 ज्योतिर्लिंग में प्रथम है सोमनाथ मंदिर, चंद्र देव ने स्थापित किया था शिवलिंग, बेहद रोचक है कहानी

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

Somnath Mandir: सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। जानिए चंद्रमा की तपस्या से जुड़ी पौराणिक कथा, मंदिर का महत्व, इतिहास और दर्शन का पुण्य। गुजरात के इस पवित्र ज्योतिर्लिंग में आने से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Somnath Mandir

सोमनाथ मंदिर हिंदू धर्म का अत्यंत पावन और प्राचीन ज्योतिर्लिंग है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान रखता है। लाखों श्रद्धालु हर साल यहां भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की आस्था, साहस और पुनर्निर्माण की जीवंत गाथा है।

पौराणिक कथा और चंद्रमा का शाप

सोमनाथ मंदिर की पौराणिक कथा चंद्रदेव से जुड़ी है। दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं का विवाह चंद्रमा से हुआ था, लेकिन चंद्रमा का पूरा प्रेम केवल रोहिणी पर था। इससे बाकी बहनों को बहुत दुख हुआ। उन्होंने पिता से शिकायत की। दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को समझाया, लेकिन जब कोई असर नहीं हुआ, तो उन्होंने क्रोध में चंद्रमा को क्षय रोग होने का शाप दे दिया।

चंद्रमा के क्षीण होने से पृथ्वी पर अंधकार और सूखा फैलने लगा। तब सभी देवताओं और ऋषियों ने ब्रह्माजी की शरण ली। ब्रह्माजी ने चंद्रमा को प्रभास क्षेत्र (आज के समय में सोमनाथ) में जाकर भगवान शिव की कठोर तपस्या करने की सलाह दी। चंद्रमा ने वहां 10 करोड़ बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया। इससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि शुक्ल पक्ष में उनकी कलाएं बढ़ेंगी और कृष्ण पक्ष में घटेंगी। साथ ही उन्होंने चंद्रमा की प्रार्थना स्वीकार कर ज्योतिर्लिंग रूप में वहां स्थापित होने का वरदान दिया। चंद्रमा को सोम के नाम से भी जाना जाता है। सोम ने शिव को अपना नाथ माना, इसलिए इस ज्योतिर्लिंग को सोमनाथ कहा जाता है।

12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। स्कंद पुराण, श्रीमद्भागवत और महाभारत में इसकी महिमा का विस्तार से वर्णन है। यहां स्नान करने और दर्शन करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

ऐतिहासिक हमले और पुनर्निर्माण

सोमनाथ मंदिर अपनी भव्यता और धन-समृद्धि के कारण कई बार आक्रमणों का शिकार बना। 11वीं शताब्दी में महमूद गजनवी ने मंदिर को लूटा और नष्ट किया। इसके बाद कई बार मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। स्वतंत्र भारत में सरदार पटेल के प्रयासों से आधुनिक मंदिर का निर्माण हुआ। आज यह मंदिर अपनी भव्यता और दिव्यता के लिए प्रसिद्ध है।

विशेष मान्यताएं और आस्था

प्राचीन काल में मंदिर का मूल शिवलिंग हवा में लटका हुआ माना जाता था, जो चुंबकीय शक्ति से ऊपर रहता था। यहां हिरण्य, कपिला और सरस्वती नदियों का त्रिवेणी संगम है। गंगा दशहरा और सोमवार को यहां विशेष पूजा होती है। मान्यता है कि सोमनाथ दर्शन से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और जीवन में शांति आती है।

सोमनाथ का महत्व

आज सोमनाथ मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। लाखों श्रद्धालु यहां आकर मानसिक शांति पाते हैं। यह मंदिर हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और आस्था के सामने कोई शक्ति टिक नहीं सकती है।

सोमनाथ दर्शन जीवन को पवित्र बनाने और नई ऊर्जा पाने का अनुपम अवसर है। जो भी यहां आता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता। भगवान शिव की कृपा से उसके पापों का नाश होता है और मार्ग प्रशस्त होता है।

Navaneet Rathaur

लेखक के बारे में

Navaneet Rathaur

संक्षिप्त विवरण

नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


विस्तृत बायो परिचय और अनुभव

डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise)

अंक ज्योतिष
हस्तरेखा विज्ञान
वास्तु शास्त्र
वैदिक ज्योतिष

और पढ़ें
जानें Sawan 2026, Rashifal और Panchang की सटीक जानकारी। रोजाना पूजा-पाठ के लिए पढ़ें Shiv Chalisa, Shiv Aarti, Shiv Mahamrityunjaya Mantra, Shiv Stuti, Hanuman Chalisa और Bajrang Baan