
MahaShivratri: महाशिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ मंदिर बाबा भोलेनाथ कहां की पोशाक करेंगे धारण
Mahashivratri: काशी विश्वनाथ धारण करेंगे ब्रजभूमि की पोशाकमथुरा, काशी व अध्योध्या में आपसी समन्वय स्थापित करने से सनातन संस्कृति स्वर्णिम शिखर पर मजबूत होगा।
Mahashivratri: काशी विश्वनाथ धारण करेंगे ब्रजभूमि की पोशाकमथुरा, काशी व अध्योध्या में आपसी समन्वय स्थापित करने से सनातन संस्कृति स्वर्णिम शिखर पर मजबूत होगा। इससे भगवान श्रीकृष्ण, बाबा विश्वनाथ व श्रीराम के भक्त एक आस्था के सूत्र में बधेंगे। इससे गंगा, यमुना और सरस्वती की संस्कृति की धारा बहेगी। इसी उद्देश्य से इस बार महाशिवरात्रि पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि से माता पार्वती और बाबा विश्वनाथ को सवा मन प्रसाद, पोशाक व अन्य श्रृंगार सामिग्री जाएंगी। यह पोशाक और अन्य सामग्री गाड़ी रूपी रथ के माध्यम से ले जाया जाएगा। आपको बता दें कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के गेस्ट हाउस में पत्रकारों से वार्ता करते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा और प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी।
कहां की पोशाक धारण करेंगे भोले बाबा
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के तत्वावधान में यह सामग्री आठ फरवरी को प्रात: 10 बजे धूमधाम से भेजी जाएगी। यह जानकारी बुधवार को पत्रकार वार्ता में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि हरि हर भाव को धारण करते हुए काशी विश्वनाथ धाम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण के साथ परामर्श करके श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं विश्वनाथ धाम के मध्य महाशिवरात्रि पर्व पर यह पावन नवाचार शिवाय विष्णु रूपाय, शिव रूपाय विष्णवे के भाव के अनुरूप करोड़ों भगवान श्रीकृष्ण व शिव के भक्तों को आनंदित करेगा। उन्होंने बताया कि महाशिव रात्रि पर 15 फरवरी को काशी विश्वनाथ मंदिर में माता पार्वती और बाबा भोलेनाथ श्रीकृष्ण जन्मभूमि से भेजी गई पोशाक व श्रृंगार धारण करेंगे और प्रसाद का भोग लगाएंगे। यह दिन भगवान शिव व पार्वती के विवाह का पर्व और निशीथ काल में शिव लिंग का प्रादुर्भाव का दिवस है।
ब्रज भूमि में महाशिव रात्रि पर्व धूमधाम से
संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि ब्रज भूमि में महाशिव रात्रि पर्व धूमधाम से मनाई जाती है। इस अवसर पर श्रीकृष्ण जन्म भूमि पर विराजमान केशवेश्वर महादेव एवं श्री अन्नपूर्णेश्वर महादेव के दर्शन एवं अर्चन के लिए हजारों श्रद्धालु पधारते हैं। संस्थान द्वारा शिव की बारात निकाली जाएगी। बातते चलें की गतवर्ष श्रीकृष्ण जन्मस्थान से होली पर काशी विश्वनाथ गुलाल भेजा गया था ।
कब है महाशिवरात्रि
इस साल फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 4 मिनट पर प्रारंभ होगी। इस तिथि का समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा। ऐसे में महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस साल महाशिवरात्रि पर उत्तम योग बन रहे हैं।

लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
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