एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ना चाहिए या नहीं? जानिए शास्त्रीय नियम

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एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ना चाहिए या नहीं? शास्त्रों के अनुसार जानें सही नियम, किन दिनों मनाही है और सोमवार को क्या करें।

Belpatra on Ekadashi
एकादशी पर बेलपत्र तोड़ने के नियम

सावन मास की पुत्रदा एकादशी को लेकर इस बार तारीख को लेकर थोड़ा उलझाव बना हुआ है। कुछ पंचांग 23 अगस्त को व्रत बता रहे हैं, तो कुछ जगह 24 अगस्त की बात कही जा रही है। एकादशी तिथि 23 अगस्त की रात से शुरू होकर 24 अगस्त सुबह तक रहेगी, इसलिए अलग-अलग परंपराओं में फर्क दिख रहा है। इस बीच कई भक्तों के मन में सवाल है कि एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ा जा सकता है या नहीं।

एकादशी पर बेलपत्र तोड़ने का नियम

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ना मना नहीं है। मुख्य रूप से तुलसी के पत्ते तोड़ने पर पाबंदी बताई गई है। बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और उनकी पूजा में इसका विशेष स्थान है। बिना बेलपत्र के शिव पूजा अधूरी मानी जाती है। एकादशी को बेलपत्र तोड़कर शिवलिंग पर चढ़ाने में कोई दोष नहीं माना गया है। भक्त श्रद्धा से इस दिन बेलपत्र तोड़कर शिवलिंग पर अर्पित कर सकते हैं।

किन दिनों बेलपत्र ना तोड़ें?

कुछ खास दिनों में बेलपत्र तोड़ना वर्जित माना गया है। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, द्वादशी, अमावस्या और पूर्णिमा को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। संक्रांति के दिन और रात के समय भी बेलपत्र तोड़ने से परहेज रखने की सलाह दी जाती है। सोमवार को भी बेलपत्र तोड़ना उचित नहीं माना गया है। ये नियम शिवपुराण और अन्य शास्त्रों में बताए गए हैं। निषिद्ध दिनों में खुद से गिरी पत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है या पहले से तोड़कर रखी पत्तियां चढ़ाई जा सकती हैं।

सोमवार को बेलपत्र क्यों ना तोड़ें?

सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते हैं। लेकिन शास्त्रों में सोमवार को बेलपत्र तोड़ने से मना किया गया है। जो लोग सोमवार का व्रत रखते हैं, उन्हें रविवार के दिन ही बेलपत्र तोड़कर रख लेने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि बेलपत्र बासी नहीं होता, इसलिए एक दिन पहले तोड़कर रखना पूरी तरह उचित है।

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बेलपत्र का धार्मिक महत्व

भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का बहुत महत्व है। भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए पूरी श्रद्धा से बेलपत्र अर्पित करते हैं। मान्यता है कि बेलपत्र शिवजी को अत्यंत प्रिय है। तीन पत्तों वाला बेलपत्र त्रिदेव का प्रतीक भी माना जाता है। नियमित रूप से सही तरीके से बेलपत्र चढ़ाने से मन की शांति मिलती है और भक्ति भाव बढ़ता है। पूजा के समय शुद्ध और ताजा बेलपत्र का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

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सही तरीका अपनाएं

बेलपत्र तोड़ते समय शुद्ध मन से तोड़ें और पौधे का सम्मान रखें। निषिद्ध दिनों से एक दिन पहले तोड़कर साफ कपड़े में रख सकते हैं। एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सोमवार और अन्य वर्जित तिथियों का ध्यान जरूर रखें।

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शास्त्रों के इन छोटे नियमों का पालन करने से पूजा का फल बढ़ता है। श्रद्धा और सही विधि दोनों ही जरूरी हैं। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए इन बातों का ध्यान रखना लाभकारी माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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डिजिटल मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे नवनीत राठौर धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा में पाठकों के लिए परोसते हैं। वो अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और करीब 5 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान नवनीत ने वेबस्टोरी, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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