Shiv Mahapuran: भगवान शिव के सोलह उपचार पूजन क्या हैं, पार्थिव शिवलिंग कैसे बनाते हैं?
Shiv Mahapuran: भगवान शिव की पूजा करते हैं तो क्या आपको पता है कि भगवान शिव के 16 उपचार पूजन किसे कहते हैं और पार्थिव शिवलिंग कैसे बनाते हैं?

भगवान शिव का पूजन बहुत खास मानाजाता है। सावन में तो खासतौर पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पूजा और उपाय किए जाते हैं। आज हम बात करेंगे शिव के सोलह उपचार पूजन और पार्थिव शिवलिंग को लेकर। सबसे पहले जानते हैं कि भगवान शिव का सोलह उपचार पूजन क्या है।
षोडशोपचार पूजन क्या है?
भगवान शिव के षोडशोपचार पूजन का अर्थ है कि भगवान शिव को पूजन के लिए 16 चरणों और 16 सामग्रियां अर्पित की जाती हैं। इसका उल्लेख शिवमहापुराण में भी किया गया है। शिवमहापुराण में लिखा है कि भगवान का सबसे पहले आवाहन करना, आसन देना, अर्घ्य देना, पाद्य पाक्ष आचमन देना, अभ्यंगपूर्वक स्नान कराना, वस्त्र अर्पित करना, गन्ध, पुष्प, धूप दीप, नैवेद्य, ताम्बूल-समर्पण, नीराजन, नमस्कार और विसर्जन करना ये सभी मिलाकर सोलह उपचार बताए गए हैं। अर्घ्य से लेकर नैवेद्य तक भगवान शिव का विधिवत् पूजन करें। ये कुल मिलाकर सोलह उपचार बताए गए हैं, इनके अनुसार ही पूजन करना चाहिए।
घर में करें या मंदिर में?
अब बात आती है कि सोलह उपचार पूजन घर में करना चाहिए या मंदिर में, तो आपको बता दें कि शिवमहापुराण में साफ लिखा है कि आप किसी मनुष्य के द्वारा स्थापित शिवलिंग ऋषियों द्वारा स्थापित शिवलिंग में, देवताओं द्वारा स्थापित शिवलिंग में, अपने-आप प्रकट हुए स्वयम्भूलिंग में और अपने हाथों से बनाए गए पार्थिव शिवलिंग में भी उपचार पूजन कर सकते हैं। इन मंदिरों में पूजा करके या पूजन सामग्री देने से भी मनुष्य सारा फल प्राप्त कर लेता है। अगर नियमपूर्वक शिवलिंग दर्शनमात्र कर लिया जाय तो वह भी कल्याणप्रद होता है।
कैसे बनाते हैं पार्थिव शिवलिंग?
सावन में भगवान शिव का पार्थिव शिवलिंग पूजा करने का विधान है। भगवान शिव की पार्थिवशिवलिंग पूजा के लिएकैसे शिवलिंग बनाने हैं, यह भी आपको जानना होगा। इसके लिए आप मिट्टी, आटा, गायके गोबर, फूल, कनेर पुष्प, गुड़, माखन, भस्म अथवा अन्न से भी अपनी रुचि के अनुसार शिवलिंग बनाकर तदनुसार उसका पूजा कर सकते हैं। पार्थिव शिवलिगं की पूजा का बहुत अधिक फल मिलता है।
इसका वर्णन शिवमहापुराण में किया गया है। आपको बता दें कि लिंगका निर्माण कहीं भी करे किसी प्रकार का निषेध नहीं है। भगवान् शिव सर्व ही भक्त के नुसार फल प्रदान करते हैं। आप कई संख्या में पार्थिव शिवलिंग बनाकर भी भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते हैं। भगवान शिव के लिए बस भाव प्रमुख हैं, अगर आप भाव से ही पूजा कर देंगे तो आपके सब मनोरथ पूरे होंगे और भगवान की कृपा से आपको शिवपद प्राप्त होगा।
लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
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