शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाना सही है या गलत? जानिए क्या कहते हैं शास्त्र

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शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाने को लेकर कई लोग कन्फ्यूज रहते हैं कि ये सही नियम है या नहीं? जानिए आखिर धर्म शास्त्रों में इस बार में क्या लिखा हुआ है? 

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शिव पूजा विधि

सावन का महीना आज से शुरू हो चुका है। इस पूरे महीने शिव भक्त शिवलिंग पर पूरी श्रद्धा के साथ गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरे समेत बाकी चीजें अर्पित करते हैं। हालांकि शिव पूजा में हल्दी के इस्तेमाल को लेकर लोग कन्फ्यूजन में रहते हैं कि इसका इस्तेमाल करना है या नहीं? आपके भी मन में ये सवाल जरूर आता होगा ना कि क्या शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाना सही माना जाता है? हालांकि कई लोग शिवलिंग पर हल्दी चढ़ा भी देते हैं तो वहीं कई लोग इसे सही नहीं मानते हैं। ऐसे में जानना जरूरी है कि आखिर धर्म ग्रंथों में इस बारे में क्या लिखा हुआ है? शिव पूजा में हल्दी का इस्तेमाल करना सही है या नहीं?

हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार शिवलिंग पर सीधे हल्दी चढ़ाने की परंपरा नहीं मानी जाती है। इसके पीछे कुछ खास वजहें भी बताई गई है जिनका संबंध भगवान शिव के स्वरूप और उनकी पूजा विधि से ही जुड़ा है।

क्यों नहीं चढ़ाते हैं शिवलिंग पर हल्दी?

1. भगवान शिव को एक तपस्वी और वैरागी देव के रूप में माना जाता है। वहीं शिवलिंग उनके पुरुष स्वरूप के प्रतीक के रूप में होता है। इसी वजह से शिवलिंग पर वहीं चीजें चढ़ाई जाती हैं सादगी और शीतलता प्रदान करते हैं। शिवलिंग पर विशेष रूप से गंगाजल, दूध, दही, सफेद चंदन और बेलपत्र के साथ-साथ आक के फूल वगैरह अर्पित किए जाते हैं।

2. अब बात करें हल्दी की तो इसे शुभता और मांगलिक काम से जोड़कर देखते हैं। इसका इस्तेमाल भी खासतौर पर शादी से जुड़ी रस्मों में भी किया जाता है। इसी वजह से शिवलिंग पर हल्दी अर्पित करने की परंपरा नहीं है। हालांकि रंगभरी एकादशी और महाशिवरात्रि के दौरान काशी विश्वनाथ में भगवान शिव को हल्दी अर्पित किया जाता है।

शिवलिंग पर हल्दी बिल्कुल भी नहीं चढ़ा सकते हैं?

अगर आपके मन में ये सवाल है तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। शिवलिंग पर जलधारी के पास हल्दी अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के हिसाब से जलधारी को मां पार्वती के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। ऐसे में यहां पर हल्दी चढ़ाना शुभ माना जाता है। भगवान शिव को हल्दी भले ना चढ़ाई जाती हो लेकिन मां पार्वती के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा में हल्दी का विशेष महत्व बताया जाता है।

शिवलिंग पर इन चीजों को भी चढ़ाने की है मनाही

हल्दी ही नहीं बल्कि शिवलिंग पर कुछ और चीजों को अर्पित करना वर्जित है। सिंदूर से लेकर कुमकुम समेत तुलसी और केतकी के फूल भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते हैं। भगवान शिव की पूजा में इन चीजों को शामिल ना करने की सलाह दी जाती है। इन चीजों के पीछे भी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई मानी जाती हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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