Shiv Katha: जब शिव जी से पिप्पलाद ने प्रतिशोध में मांगा वरदान, फंस गए थे खुद के संकट में प्राण

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कहा जाता है कि वरदान बहुत सोच-समझकर मांगना चाहिए। दरअसल वरदान मांगने की भी मर्यादा होती है। अगर मर्यादा का ध्यान नहीं रखा जाए तो कभी-कभी परिणाम विपरीत भी हो सकते हैं। यहां पढ़ें भगवान शिव और पिप्पलाद से जुड़ी कहानी।

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महर्षि पिप्पलाद और भगवान शिव की कहानी

Shiv ji ki Kahani: वरदान बहुत सोच-समझकर मांगना चाहिए। बिना विचारे मांगे गए वरदान से कई बार मांगने वाले का ही अहित हो जाता है। इस संबंध में एक कथा है। दधीचि मुनि ने इंद्र की सहायता के लिए स्वेच्छा से अपनी देह त्याग दी। उनकी हड्डियों से बने वज्र से वृत्रासुर का वध हुआ। ऋषि दधीचि के पुत्र पिप्पलाद ने यह समझा कि उनके पिता को इंद्र ने मारा है। वह प्रतिशोध की अग्नि में जलने लगा।

भगवान शिव से मांगा पिप्पलाद ने वरदान

पिप्पलाद ने कठोर तपस्या करके शिव से वर मांगा, ‘हे भोलेनाथ! आप अपना तीसरा नेत्र खोलकर इंद्र सहित सभी देवताओं को भस्म कर दिजिए।’

शिव ने पिप्पलाद से पूछा, ‘हे भक्त! तुमने क्या इसलिए तपस्या की है कि मैं अपना तीसरा नेत्र खोलकर पूरे विश्व को जला दूं? मैं एक बार अपना नेत्र खोलूंगा, तो पूरा विश्व जलकर राख हो जाएगा।’

पिप्पलाद ने शिव से वही वर देने के लिए आग्रह किया। शिव ने कहा, ‘हे वत्स! तुम अभी प्रतिशोध की भावना से भरे हो। तुम्हें अच्छा-बुरा कुछ नहीं सूझ रहा है। तुमने मुझसे वरदान मांगा है, तो मैं तुम्हें यह वरदान देता हूं, लेकिन इसका परिणाम तुम्हें बाद में पता चलेगा।’

जब शिव जी खोली तीसरी आंख

शिव ने अपना तीसरा नेत्र थोड़ा खोला ही था कि पिप्पलाद को लगा, जैसे उसका शरीर जल रहा है। उसने पीड़ा से दुखी होकर शिव से पूछा कि वे देवताओं की जगह उसे क्यों जला रहे हैं।

शिव ने पिप्पलाद से कहा, ‘मैं तुम्हें नहीं जला रहा हूं। मैं देवताओं को ही जला रहा हूं, लेकिन क्या तुम जानते हो कि देवता कहां हैं? वह हर प्राणी की देह में रहते हैं। इंद्र तुम्हारे अंदर वास करते हैं। तुम्हारी आंखों में सूर्य, तुम्हारी नाक में अश्विनी कुमार, मस्तिष्क में चंद्रमा वास करते हैं। जब मैं देवताओं को जला रहा हूं, तुम इसे महसूस कर रहे हो।’

यह सुनकर पिप्पलाद का अविवेक दूर हुआ। उसे अपनी दुर्बुद्धि के परिणाम मिले। उसने तुरंत शिव के आगे साष्टांग प्रणाम करते हुए कहा, ‘हे भगवन! आप अपना तीसरा नेत्र बंद कीजिए । मुझे ऐसा वर दो कि मैं आपका सदा भक्त बना रहूं।’

डॉ. एम आर राजेश्वरी

(साभार : हिंदू पुराणों की नीति कथाएं, तिरुमल तिरुपति देवस्थानम, तिरुपति

Saumya Tiwari

लेखक के बारे में

Saumya Tiwari

संक्षिप्त विवरण

सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव

सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।


इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।


इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।


व्यक्तिगत रुचियां

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।


विशेषज्ञता

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