Shiv ji ki Kahani: भगवान शिव ने मगरमच्छ बनकर क्यों ली थी माता पार्वती की परीक्षा? पढ़ें पौराणिक कथा
Shiv ji ne parvati ji kaise pariksha li thi: भगवान शिव ने माता पार्वती की परीक्षा लेने के लिए मगरमच्छ का रूप धारण किया था। पढ़ें यहां भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी पौराणिक कहानी।

Bhagwan shiv aur mata parvati pariksha kahani: सावन माह में भगवान शिव की आराधना करने के साथ कथा सुनने का भी महत्व है। शिव पुराण में भगवान शिव से जुड़े कई प्रसंग वर्णित हैं। इसमें भगवान शिव के अवतारों और वरदान से जुड़ी कथाएं भी वर्णित हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि आखिर क्यों भगवान शिव ने मगरमच्छ का रूप धारण कर माता पार्वती की परीक्षा ली थी। पढ़ें यहां कथा।
शिव पुराण में वर्णित एक प्रसंग के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठिन तप कर रही थीं। उनके तप को देखकर देवी-देवताओं ने भगवान शिव से माता पार्वती की मनोकामना पूर्ण करने का आग्रह किया। भगवान शिव ने माता पार्वती की परीक्षा लेने के लिए सप्तर्षियों को भेजा। सप्तर्षियों ने माता पार्वती को भगवान शिव के कई अवगुण गिनाएं लेकिन उन्हें भोलेनाथ के अलावा और से विवाह मंजूर नहीं था। विवाह से पूर्व भगवान शिव अपनी भावी पत्नी को लेकर आश्वस्त होना चाहते थे। इसलिए उन्होंने माता पार्वती की स्वयं परीक्षा लेने की सोची।
जब लड़के को मगरमच्छ ने पकड़ लिया
भगवान शिव प्रकट हुए और माता पार्वती को वरदान देकर अंतर्ध्यान हो गए। इतने में जहां माता तप कर रही थीं, वहीं पास में मगरमच्छ ने एक लड़के को पकड़ लिया। लड़का जान बचाने के लिए चिल्ला रहा था। माता पार्वती लड़के की चीख नहीं सुन सकी और उसकी मदद के लिए तालाब के पास पहुंचीं। माता पार्वती ने देखा कि एक मगरमच्छ लड़के को अंदर की ओर ले जा रहा है।
लड़के ने माता पार्वती से कहा कि माता मेरी आप रक्षा करें। मेरी ना तो मां हैं और ना ही पिता। ना ही कोई मित्र। पार्वती जी ने मगरमच्छ से लड़के को छोड़ने के लिए कहा। मगरमच्छ बोला- दिन के छठे पहर में जो मिलता है, उसे अपना आहार समझ कर खाना मेरा नियम है। पार्वती जी ने कहा- इसे छोड़ दो, बदले में मुझसे जो चाहिए वह बता दो।
मगरमच्छ ने मांगा माता पार्वती से तप का फल
मगरमच्छ बोला- मैं एक ही शर्त पर छोड़ सकता हूं। आपने अपने तप से भगवान शिव से जो वरदान प्राप्त किया, अगर उसका फल आप मुझे दे दें, तो मैं इसे छोड़ दूंगा। माता पार्वती अपने तप का फल देने के लिए राजी हो गईं।
मगरमच्छ ने समझाया कि देवी सोच लीजिए। आपने हजारों वर्षों तक जैसा तप किया है वह देवी-देवताओं के लिए संभव नहीं है। पार्वती जी ने कहा कि उनका फैसला अडिग है। मगरमच्छ ने पार्वती माता से तपदान का संकल्प करवाया। तप का दान होते ही मगरमच्छ का शरीर चमकने लगा। मगर माता पार्वती से बोला- देवी आपके तप के प्रभाव से मैं तेजस्वी बन गया हूं। आपने अपने जीवन भर की पूंजी बच्चे के लिए व्यर्थ कर दी। आप चाहें मैं आपको एक और मौका दे सकता हूं।
माता पार्वती कहती हैं- मैं तप फिर से कर सकती हूं लेकिन तुम इस लड़के को निगल जाते, तो इसका जीवन वापस कैसे मिल पाता? देखते ही देखते मगरमच्छ और लड़का दोनों ही विलुप्त हो गए।
भगवान शिव हुए प्रकट
माता पार्वती के मन में विचार आया कि तप का फल दान कर दिया था। अब पुन: तप प्रारंभ करना चाहिए। पार्वती जी ने तप प्रारंभ करने के लिए संकल्प लिया। भगवान शिव प्रकट हुए और बोले- पार्वती, अब क्यों तप कर रही हो?
पार्वती जी ने भगवान शिव से कहा- मैंने अपने तप का फल दान कर दिया है। आपको पति के रूप में पाने के लिए वैसा ही घोर तप करूंगी और आपको प्रसन्न करूंगी। भोलेनाथ बोले- मगरमच्छ और लड़के के रूप में मैं ही था। मैंने परीक्षा लेने के लिए यह पूरी लीला रची थी। तुमने अपने तप का दान मुझे ही दिया है, इसलिए पुन: तप करने की आवश्यकता नहीं है। माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रणाम करते हुए प्रसन्न मन से विदा किया।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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Saumya Tiwariसंक्षिप्त विवरण
सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।
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सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।
इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।
इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।
विशेषज्ञता
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