Shiv Ji Ki Aarti: शिव जी की आरती- ‘ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा’- महाशिवरात्रि पर जरूर करें ये आरती
हिंदू धर्म में आरती का खास महत्व होता है। माना जाता है कि आरती करने से भगवान की विशेष कृपा मिलती है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिव जी की आरती जरूर करनी चाहिए। माना जाता है कि आरती करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

Shiv Ji Ki Aarti: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व बहुत पावन और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और शक्ति का मिलन हुआ था। ईशान संहिता के अनुसार, फाल्गुन मास की चतुर्दशी को भगवान शिव दिव्य ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। वहीं शिवपुराण में वर्णित एक कथा के मुताबिक, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था और भोलेनाथ ने वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन अपनाया था। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन विधि-विधान से भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कष्टों से राहत मिलती है। इस दिन जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और शिव मंत्रों के जप के साथ पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में आरती का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि आरती करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। महाशिवरात्रि के दिन शिव जी की आरती करने से भक्तों को विशेष फल मिलता है।
Shiv Ji Ki Aarti, शिव जी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा,
स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,
अर्द्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥
एकानन चतुरानन
पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥
दो भुज चार चतुर्भुज
दसभुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूप निरखते
त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥
अक्षमाला वनमाला,
मुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै,
भाले शशिधारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर
बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक
भूतादिक संगे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥
कर के मध्य कमंडल
चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी
जगपालन कारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर में शोभित
ये तीनों एका ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति
जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी
सुख संपति पावे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥





