आज है अधिक मास अमावस्या, शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम करने के लिए मीन, मेष और कुंभ राशि वाले करें ये उपाय

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
Follow us on Google News
share

Adhik maas ki amavasya ka upay shani sadhesati upay: ज्योतिष गणना के अनुसार, इस समय मेष, मीन और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। मान्यता है सोमवती अमावस्या के दिन कुछ कारगार उपाय की मदद से शनि ग्रह का बुरा प्रभाव कम कर सकते हैं। 

आज है अधिक मास अमावस्या, शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम करने के लिए मीन, मेष और कुंभ राशि वाले करें ये उपाय

Adhik maas ki amavasya ka upay shani sadhesati upay: ज्योतिध की दृष्टि से शनि की साढ़ेसाती का समय बेहद कष्टकारी माना जाता है। जिन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहता है, उनके जीवन में कई बदलाव देखने को मिलते हैं। पंचांग के अनुसार, आज के दिन ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या है। इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जाएगा। मान्यता है सोमवती अमावस्या के दिन कुछ कारगार उपाय की मदद से शनि ग्रह का बुरा प्रभाव कम कर सकते हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस समय मेष, मीन और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। ऐसे में आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या पर कौन सा उपाय करने से शनि की साढ़ेसाती के बुरे प्रभाव से राहत मिल सकती है-

आज है अधिक मास अमावस्या, शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम करने के लिए मीन, मेष और कुंभ राशि वाले करें ये उपाय

सोमवती अमावस्या पर क्या उपाय करें- सोमवती अमावस्या पर शिव चालीसा का पाठ करें। इसके साथ ही भगवान हनुमान की पूजा करें और मंत्र जाप भी करें। मान्यता है शनि देव शिव और हनुमान भक्तों को ज्यादा परेशान नहीं करते हैं।

आगे पढ़ें शिव चालीसा...

दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान ।

कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥

चौपाई

जय गिरिजा पति दीन दयाला ।

सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।

कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये ।

मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।

छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

मैना मातु की हवे दुलारी ।

बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।

करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।

सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ ।

या छवि को कहि जात न काऊ ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा ।

तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी ।

देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ ।

लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा ।

सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।

सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी ।

पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।

सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई।

अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।

जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई ।

नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।

जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी ।

कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।

कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।

भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी ।

करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।

भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।

येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।

संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई ।

संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी ।

आय हरहु मम संकट भारी ॥

धन निर्धन को देत सदा हीं ।

जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।

क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन ।

मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।

शारद नारद शीश नवावैं ॥

नमो नमो जय नमः शिवाय ।

सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई ।

ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।

पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।

निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे ।

ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।

ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।

शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे ।

अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।

जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

दोहा

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा ।

तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।

अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Shrishti Chaubey

लेखक के बारे में

Shrishti Chaubey

संक्षिप्त विवरण
सृष्टि चौबे पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों का अनुभव रखती हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं। वह ज्योतिष, ग्रह गोचर, राशिफल, नक्षत्र परिवर्तन, अंकज्योतिष, रत्न, और वास्तु से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। पाठक-केंद्रित व आसान भाषा में जानकारी पेश करना इनके लेखन की पहचान है। धार्मिक ग्रंथों को पढ़कर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना और उन पर शोध करना इनकी विशेष पसंद है।

विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव
सृष्टि पिछले ढाई साल से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। ज्योतिष से जुड़े किसी भी टॉपिक को पाठकों तक आसान, प्रामाणिक और आकर्षक भाषा में पहुंचाना, सृष्टि बखूबी जानती हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए सृष्टि ने रीडर बिहेवियर,बदलते कंटेंट फॉर्मेट पर अच्छी पकड़ हासिल की है। पाठकों की रुचियों व जरूरतों को समझते हुए वे फैक्ट आधारित उपयोगी जानकारी पहुंचाने की कोशिश करती हैं।
अपने करियर की शुरुआत इन्होंने हिन्दी दैनिक समाचार पत्र से की। इसके बाद इन्होंने डिजिटल मीडिया में कदम रखा। सृष्टि वेब स्टोरी, यूट्यूब शॉर्ट्स व इंस्टाग्राम रील्स जैसे विभिन्न डिजिटल स्टोरीटेलिंग फॉर्मेट का अनुभव रखती हैं। मनोरंजन, खेल व सेहत पर अच्छी पकड़ के साथ अब सृष्टि ज्योतिष और धार्मिक विषयों को कवर कर अपनी पहचान बना रही हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान बतौर संपादक इन्होंने कैम्पस समाचार पत्र प्रकाशित किया, लाइव रिपोर्टिंग की। डाटा स्टोरी और फैक्ट चेकिंग की भी अच्छी समझ रखती हैं। सामाजिक मुद्दे पर डॉक्यूमेंट्री भी बना चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और दृष्टिकोण
सृष्टि का मानना है कि एस्ट्रोलॉजी का उद्देश्य फैक्ट आधारित उपयोगी जानकारी को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है। इनका फोकस रहता है कि ज्योतिषीय जानकारी को आसान भाषा में रचनात्मक तरीके से पेश करें।

व्यक्तिगत रुचियां
सृष्टि को ट्रैवल करना, किताबें पढ़ना, म्यूजिक सुनना, लिखना और नई चीजें सीखने का शौक है। इनका मानना है कि पर्सनल ग्रोथ के लिए खुद को अपडेट रखना चाहिए।

विशेषज्ञता
राशिफल
साप्ताहिक राशिफल
ग्रह गोचर
नक्षत्र परिवर्तन
अंकज्योतिष
व्रत-त्योहार, पूजा-विधि
रत्न विज्ञान
ज्योतिषीय उपाय
वास्तु शास्त्र
हस्तरेखा

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!