शीतला अष्टमी के दिन बच्चों को हल्दी का टीका क्यों लगाते हैं? जानिए धार्मिक कारण

Navaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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साल 2026 में शीतला अष्टमी यानी बसोड़ा पर्व 11 मार्च, दिन - बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन माताएं अपने बच्चों को हल्दी का टीका लगाती हैं, लेकिन रोली का प्रयोग वर्जित रखती हैं। आइए जानें कारण।

शीतला अष्टमी के दिन बच्चों को हल्दी का टीका क्यों लगाते हैं? जानिए धार्मिक कारण

शीतला अष्टमी चैत्र मास की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है, जिन्हें शीतलता, स्वास्थ्य और बच्चों की रक्षा की देवी माना जाता है। इस पर्व का मुख्य संबंध चेचक, खसरा और अन्य त्वचा रोगों से मुक्ति से जुड़ा है। साल 2026 में शीतला अष्टमी यानी बसोड़ा पर्व 11 मार्च, दिन - बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन माताएं अपने बच्चों को हल्दी का टीका लगाती हैं, लेकिन रोली का प्रयोग वर्जित रखती हैं। इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक कारण है। आइए जानते हैं कि शीतला अष्टमी पर हल्दी का टीका लगाने का क्या महत्व है और रोली क्यों नहीं लगाई जाती।

माता शीतला का शीतल स्वरूप

माता शीतला को शीतलता और ठंडक की देवी कहा जाता है। इनका स्वरूप शांत और करुणामयी है। इन्हें चेचक रोग की अधिष्ठात्री भी माना जाता है। मान्यता है कि इनकी पूजा से बच्चे रोग-मुक्त रहते हैं और शरीर में ठंडक बनी रहती है। पूजा में गर्म तासीर वाली चीजों का प्रयोग नहीं किया जाता, क्योंकि गर्मी माता के शीतल स्वरूप के विपरीत होती है। इसी कारण रोली (जो गर्म तासीर वाली होती है) का प्रयोग वर्जित है।

रोली का प्रयोग क्यों वर्जित है?

रोली लाल रंग की होती है और इसमें चूना, हल्दी और केसर का मिश्रण होता है। ज्योतिष और आयुर्वेद के अनुसार रोली गर्म प्रकृति की है। शीतला माता शीतल (ठंडी) हैं, इसलिए उनकी पूजा में गर्म तासीर वाली चीजें नहीं चढ़ाई जातीं। रोली लगाने से बच्चे के शरीर में गर्मी बढ़ सकती है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए शीतला अष्टमी पर केवल हल्दी या चंदन का टीका लगाया जाता है।

हल्दी का टीका लगाने का धार्मिक कारण

हल्दी शीतल, रोगनाशक और शुद्धिकरण करने वाली होती है। आयुर्वेद में हल्दी को रोगाणुनाशक और त्वचा रोगों में लाभकारी बताया गया है। शीतला माता को प्रसन्न करने के लिए हल्दी का टीका लगाना सबसे उत्तम माना जाता है। यह टीका बच्चे के माथे पर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा, दुष्ट दृष्टि और रोगों से रक्षा होती है। साथ ही बच्चे की एकाग्रता बढ़ती है और मन शांत रहता है।

शीतला अष्टमी पर हल्दी से पूजा कैसे करें?

  • पूजा की थाली में हल्दी जरूर रखें।
  • एक सफेद कोरा कागज लें और उस पर हल्दी से 7 स्वास्तिक बनाएं।
  • माता शीतला को हल्दी का टीका लगाएं।
  • उसी हल्दी से बच्चों के माथे पर टीका लगाएं।
  • स्वास्तिक वाला कागज घर की चौखट पर लगाएं।

यह कार्य बच्चे के शरीर को शीतल रखता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है और रोगों से सुरक्षा देता है।

हल्दी के टीके से मिलने वाले लाभ

हल्दी का टीका केवल धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि पूर्वजों का स्वास्थ्य से जुड़ा ज्ञान है। हल्दी में एंटीसेप्टिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। यह त्वचा रोगों से बचाव करती है, एकाग्रता बढ़ाती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर करती है। शीतला अष्टमी पर हल्दी का टीका लगाने से बच्चे का शरीर शीतल रहता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और माता शीतला की कृपा से लंबी आयु व अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है।

शीतला अष्टमी पर हल्दी का टीका लगाना धर्म और स्वास्थ्य का अनोखा संगम है। इस दिन मां शीतला की पूजा करें, हल्दी का टीका लगाएं और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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