शीतला अष्टमी 2026: कब है बसोड़ा? जानें मां शीतला की पूजा विधि और बासी भोजन का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह व्रत चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। कई जगहों पर इसे बसोड़ा या बसोड़ा अष्टमी भी कहा जाता है। यह पर्व खासतौर पर उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

Sheetala Ashtami 2026: हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह व्रत चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। कई जगहों पर इसे बसोड़ा या बसोड़ा अष्टमी भी कहा जाता है। यह पर्व खासतौर पर उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां शीतला की पूजा करने से घर-परिवार को रोग और संक्रमण से सुरक्षा मिलती है। यही कारण है कि गर्मी के मौसम की शुरुआत में इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन विशेष रूप से बासी भोजन का भोग मां शीतला को लगाया जाता है।
शीतला अष्टमी 2026 की तिथि- हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल चैत्र कृष्ण अष्टमी की तिथि 11 मार्च 2026 की रात 1 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 12 मार्च 2026 की सुबह 4 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार शीतला अष्टमी का पर्व 11 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।
मां शीतला का धार्मिक महत्व- धार्मिक ग्रंथों में मां शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना गया है। स्कंद पुराण में भी इनके स्वरूप का उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार मां शीतला का वाहन गधा है और उनके हाथों में कलश, झाड़ू, सूप और नीम की पत्तियां रहती हैं। इन सभी वस्तुओं का संबंध शुद्धता और रोगों से बचाव से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि मां शीतला की पूजा करने से चेचक और अन्य संक्रामक रोगों से रक्षा होती है।
शीतला अष्टमी पर बासी भोजन का महत्व- शीतला अष्टमी के दिन मां को एक दिन पहले तैयार किया गया भोजन अर्पित किया जाता है। इसलिए इस पर्व को बसोड़ा भी कहा जाता है। परंपरा के अनुसार सप्तमी के दिन घर में भोजन बनाकर रख लिया जाता है और अष्टमी के दिन उसी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। धार्मिक मान्यता यह भी है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता और ठंडे भोजन से मां शीतला को भोग लगाया जाता है।
शीतला अष्टमी की पूजा विधि- शीतला अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और पूजा की तैयारी करनी चाहिए। पूजा की थाली में पुआ, रोटी, दही, बाजरा और मीठे चावल जैसे व्यंजन रखे जाते हैं। इसके साथ रोली, हल्दी, अक्षत, मेहंदी और कुछ सिक्के भी पूजा सामग्री में शामिल किए जाते हैं। माता शीतला की पूजा करते समय उन्हें ठंडे जल का अर्घ्य दिया जाता है और बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद परिवार के सदस्यों के माथे पर हल्दी का तिलक लगाया जाता है और घर में शांति व स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
बच्चों के स्वास्थ्य के लिए उपाय- मान्यता है कि शीतला अष्टमी के दिन बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए विशेष उपाय भी किए जाते हैं। इस दिन मां शीतला को चांदी का छोटा चौकोर टुकड़ा अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद उस चांदी के टुकड़े को लाल धागे में बांधकर बच्चे को पहनाने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है। धार्मिक विश्वास है कि ऐसा करने से बच्चों को रोगों से रक्षा मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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लेखक के बारे में
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