Sheetala Ashtami 2026: 11 मार्च को है बसोड़ा पर्व, जानिए इस दिन क्यों खाते हैं ठंडा खाना

Mar 08, 2026 09:42 pm ISTNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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2026 में शीतला अष्टमी 11 मार्च को मनाई जाएगी। यह त्योहार ऋतु परिवर्तन, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं इसकी परंपरा, महत्व और नियम।

Sheetala Ashtami 2026: 11 मार्च को है बसोड़ा पर्व, जानिए इस दिन क्यों खाते हैं ठंडा खाना

शीतला अष्टमी हिंदू धर्म का एक अनूठा त्योहार है, जो चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह होली के ठीक आठवें दिन पड़ता है और उत्तर भारत में इसे बसोड़ा या बासी का त्योहार कहा जाता है। इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले बने ठंडे (बासी) भोजन को ही ग्रहण किया जाता है। 2026 में शीतला अष्टमी 11 मार्च को मनाई जाएगी। यह त्योहार ऋतु परिवर्तन, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं इसकी परंपरा, महत्व और नियम।

शीतला अष्टमी 2026 की तिथि और समय

पंचांग के अनुसार, चैत्र कृष्ण अष्टमी तिथि 10 मार्च 2026 को शाम से शुरू होकर 11 मार्च 2026 को शाम तक रहेगी। उदय तिथि के आधार पर बसोड़ा पर्व 11 मार्च 2026, दिन - बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए पूजा और व्रत इसी दिन श्रेष्ठ है। शाम को शीतला माता की आरती और प्रसाद वितरण होता है।

शीतला माता का स्वरूप और महत्व

शीतला माता को संक्रामक रोगों (चेचक, खसरा, बुखार) की देवी माना जाता है। उनका वाहन गधा है, एक हाथ में झाड़ू और दूसरे में शीतल जल का कलश रहता है। झाड़ू सफाई का प्रतीक है और कलश शीतलता का। मान्यता है कि गर्मी के मौसम में इन रोगों का प्रकोप बढ़ता है, इसलिए माता को प्रसन्न कर उनके प्रकोप से रक्षा मांगी जाती है। इस दिन ठंडा भोजन चढ़ाने से माता शांत रहती हैं और परिवार को रोगों से बचाती हैं।

इस दिन ठंडा (बासी) खाना क्यों खाते हैं?

बसोड़ा पर्व का मुख्य आकर्षण ठंडा भोजन है। होली की सप्तमी (रंगभरी सप्तमी) की रात को मीठे चावल, राबड़ी, पूरी, चने की दाल, गुड़िया (मीठी पूरी) आदि बनाए जाते हैं। अष्टमी को चूल्हा नहीं जलाया जाता है। कारण यह है कि गर्म भोजन या अग्नि से ताप बढ़ता है, जो माता शीतला को प्रिय नहीं है। ठंडा भोजन शरीर को शीतल रखता है और गर्मी में होने वाले रोगों से बचाव करता है। यह परंपरा हमें संयम और सादगी भी सिखाती है।

शीतला अष्टमी पर क्या करें और क्या ना करें

क्या करें

  • सुबह स्नान कर शीतला माता की पूजा करें।
  • ठंडा भोजन माता को अर्पित कर प्रसाद बांटें।
  • घर और आंगन की सफाई करें, झाड़ू से पूजा स्थल साफ करें।
  • बच्चे और परिवार के साथ ठंडा भोजन ग्रहण करें।

क्या ना करें

  • चूल्हा, गैस या कोई भी आग ना जलाएं।
  • ताजा या गरम भोजन ना बनाएं।
  • कई क्षेत्रों में सिर धोना, सिलाई-कढ़ाई या नाखून काटना वर्जित है।
  • झगड़ा या नकारात्मक बातें ना करें।

त्योहार का स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी संदेश

शीतला अष्टमी हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने की सीख देती है। गर्मी की शुरुआत में ठंडा भोजन और अग्नि से परहेज स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। यह त्योहार स्वच्छता, संयम और रोग निवारण का प्रतीक है। आज के समय में यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि मौसम के अनुसार खान-पान और जीवनशैली बदलनी चाहिए। शीतला माता की कृपा से सभी को रोगमुक्ति और सुख प्राप्त हो।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Navaneet Rathaur

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नवनीत राठौर नए युग के डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में करीब 7 साल का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन के हिस्सा हैं। यहां वह अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष से जुड़ी खबरें लिखते हैं।


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नवनीत ने शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक और शुभारती विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।


नवनीत राठौर ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत जनतंत्र न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने सूर्या समाचार और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद नवनीत लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। पाठकों को सरल, विश्वसनीय और प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना ही नवनीत राठौर का मुख्य उद्देश्य है।


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