
Shattila Ekadashi Katha: षट्तिला एकादशी के दिन जरूर करें इस कथा का पाठ, इसके बिना है अधूरा व्रत
Shattila ekadashi 2026 Vrat ki katha in hindi: आज माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी हैं। इस एकादशी में तिल का बहुत अधिक महत्व है। आइए यहां पढ़ें षट्तिला एकादशी व्रत की कथा
Shattila ekadashi 2026 katha in hindi: माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहते हैं। इस एकादशी में तिल का बहुत अधिक महत्व है। पद्मपुराण में श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इस एकादशी का महत्व बताया है। इसमें कहा गया है कि श्रीभगवान ने कहा है कि माघ मासके कृष्ण पक्ष की जो एकादशी है, वह षट्तिला के नामसे विख्यात है, जो सब पापोंका नाश करनेवाली है। अब तुम 'घट्तिला'की पापहारिणी कथा सुनो, जिसे मुनिश्रेष्ठ पुलस्त्यने दाल्भ्यसे कहा था। दाल्भ्यने पूछा--ब्रह्मन् ! मृत्युलोकमें आये हुए प्राणी प्रायः पापकर्म करते हैं। उन्हें नरक में न जाना पड़े, इसके लिये कौन-सा उपाय है? बतानेकी कृपा करें। पुलस्त्यजी बोले-महाभाग ! तुमने बहुत अच्छी बात पूछी है, बतलाता हूं; सुनो। माघ मास आने पर मनुष्य को चाहिए कि वह नहा-धोकर पवित्र हो इन्द्रियों को संयममें रखते हुए काम, क्रोध, अहंकार, लोभ और चुगली आदि बुराइयों को त्याग दे। भगवान का स्मरण करके जलसे पैर धोकर भूमिपर पड़े हुए गोबर का संग्रह करे। उसमें तिल और कपास छोड़कर एक सौ आठ पिंडिकाएं बनाएं। फिर माघमें जब आर्द्री या मूल नक्षत्र आए, तंब कृष्ण पक्ष की एकादशी करने के लिए नियम ग्रहण करें। अच्छे से स्नान करके पवित्र हो शुद्धभाव से देवाधिदेव श्रीविष्णुकी पूजा करें। कोई भूल हो जाने पर श्रीकृष्ण का नामोचारण करें। रात को जागरण और होम करें। चन्दन, अरगजा, कपूर, नेवेद्य आदि सामग्री से चक्र और गदा धारण करने वाले देवदेवेश्वर श्रीहरिकी पूजा करें। तत्पश्चात्भ गवान का स्मरण करके बारम्बार श्रीकृष्णनामका उच्चारण करते हुए कुम्हड़े, नारियल अथवा बिजौरे के फलसे भगवान को अर्ध्य दे।
एक कथा इस प्रकार है
इस पर नारद जी ने एक कथा सुनाई उन्होंने बताया कि एक ब्राह्मणी थी। वह चान्द्रायणादि व्रत किया करती थी। उसके व्रतों के प्रभाव के कारण उसे सभी पाप नष्ट हो गए थे। वह व्रत करते-करते बहुत दुर्लभ हो गई थी। ऐसे में नारदजी ने सोचा कि इस ब्राहम्णी से कुछ दान मांग कर आता हूं। इस पर वह भिक्षक बन उसके द्वार पर पहुंचा और ब्राह्मणीसे भिक्षा के तौर पर मिट्टी का ढेर मिला। कुछ दिन बाद ब्राह्मणी का निधन हो गया। वह स्वर्ग गई, लेकिन जब स्वर्ग जाकर उसने देखा तो उसे मिट्टी के ढ़ेर के दान में एक महल मिला, लेकिन बाकी कुछ नहीं था, वह नारद जी के पास मदद के लिए पहुंची। नारद जी ने कहा कि आपने व्रत किए और पाप नष्ट होने के कारण आपको स्वर्ग मिला। आपने जो दान किया उसका महल मिला, लेकिन और कुछ दान नहीं किया तो अब क्या मिले। इस पर ब्राह्मणी ने कहा कि ऐसी गरीबी कैसे कम करूं। इस पर नारद जी ने कहा कि कल तुम्हारे पर देव कन्या आएंगी, तुम दरवाजा खोले बिना षटतिला एकादशी व्रत का महात्मय सुन लेना। जब देवकन्या आईं थी ब्राह्मणी ने वैसा ही किया। देवकन्या बोलीं कि यह षटतिला एकादशी का व्रत भाग्य को संवारने वाला और गौ हत्या, ब्रा्म हत्या जैसे महापाप का शमन करने वाला है। ऐसा सुन ने के बाद ब्राह्मणी ने भी व्रत किया और उसके महल में सभी विभूतियां आ गईं। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को करने वाले और इस दिन तिल का दान करने वाले को स्वर्ग मिलता है।





