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Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी कल, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और उपाय

Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी कल, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और उपाय

संक्षेप:

Shattila Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी व्रत को बहुत पुण्य देने वाला माना गया है। यह दिन भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है, जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और व्यक्ति धीरे-धीरे मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

Jan 13, 2026 02:22 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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Shattila Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी व्रत को बहुत पुण्य देने वाला माना गया है। यह दिन भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है, जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और व्यक्ति धीरे-धीरे मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ता है। माघ महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी खास तौर पर दान, संयम और सेवा का पर्व मानी जाती है। साल 2026 में यह व्रत भक्तों के लिए आध्यात्मिक रूप से बहुत खास माना जा रहा है।

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षटतिला एकादशी 2026 कब है- वैदिक पंचांग के अनुसार, षटतिला एकादशी की तिथि 13 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 3:17 बजे शुरू होगी और 14 जनवरी 2026 को शाम करीब 5:52 बजे समाप्त होगी। हिंदू धर्म में उदयातिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए षटतिला एकादशी का व्रत बुधवार, 14 जनवरी 2026 को रखा जाएगा।

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पारण (व्रत खोलने का समय): 15 जनवरी 2026 को सुबह लगभग 7:00 बजे से 9:30 बजे तक

षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व- ‘षटतिला’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- षट यानी छह और तिला यानी तिल। इस दिन तिल का छह अलग-अलग तरीकों से उपयोग करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिल भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है। तिल के प्रयोग से दरिद्रता दूर होती है, पाप कटते हैं और सुख-समृद्धि आती है। पुराणों में बताया गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा के साथ यह व्रत रखता है, तिल का दान करता है और भगवान विष्णु का स्मरण करता है, उसके पिछले जन्मों के दोष भी दूर हो जाते हैं। यह व्रत मन, वाणी और कर्म- तीनों स्तरों पर शुद्धि का पर्व माना जाता है।

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षटतिला एकादशी पूजा विधि: षटतिला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, अगर संभव हो तो नहाने के पानी में थोड़ा काला तिल मिला लें। साफ कपड़े पहनकर घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाएं, भगवान को तिल, फल, फूल और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद विष्णु मंत्र या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें। दिन भर व्रत रखें और मन में गलत विचार न आने दें। जरूरतमंद को तिल, भोजन या कपड़े का दान करें। शाम को फिर से भगवान विष्णु की आरती करें और अगले दिन पारण के समय व्रत खोलें।

उपाय- षटतिला एकादशी पर करें ये उपाय: षटतिला एकादशी पर तिल से जुड़े कुछ खास उपाय किए जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन तिल का इन छह तरीकों से उपयोग करना शुभ माना जाता है:

तिल मिले जल से स्नान- इससे शरीर और मन की शुद्धि होती है

तिल का उबटन लगाना- नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है

हवन में तिल अर्पित करना- ईश्वर की कृपा मिलती है

तिल से तर्पण करना- पितरों को शांति मिलती है

तिल से बने भोजन का सेवन- शुभ फल देता है

तिल का दान करना- व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है

षटतिला एकादशी पर क्या दान करें- इस दिन अन्न दान को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। जरूरतमंदों को भोजन कराना बहुत पुण्य देने वाला माना जाता है। इसके अलावा तिल, कपड़े और भोजन का दान भी किया जा सकता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण


योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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