Hindi Newsधर्म न्यूज़Sharad Purnima 2025: Moon Puja and Arghya Vidhi Know When and How to Perform Sharad Purnima Rituals
शरद पूर्णिमा पर कैसे करें चांद की पूजा? जानें अर्घ्य देने की सही विधि

शरद पूर्णिमा पर कैसे करें चांद की पूजा? जानें अर्घ्य देने की सही विधि

संक्षेप:

अश्विन माह की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कोजागरी लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं के साथ उदित होता है और उसकी चांदनी पृथ्वी पर अमृत की वर्षा करती है।

Oct 04, 2025 08:36 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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अश्विन माह की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कोजागरी लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं के साथ उदित होता है और उसकी चांदनी पृथ्वी पर अमृत की वर्षा करती है। यही कारण है कि शरद पूर्णिमा की रात को साल की सबसे विशेष और शुभ रात माना जाता है।

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शरद पूर्णिमा 2025 की तिथि और समय

वर्ष 2025 में शरद पूर्णिमा का पर्व सोमवार, 6 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि का आरंभ दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर होगा और अगले दिन 7 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 16 मिनट पर इसका समापन होगा।

शरद पूर्णिमा की विशेषता

कहा जाता है कि इस रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने से वह अमृत तुल्य हो जाती है। मिट्टी के बर्तन में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखी जाती है और अगले दिन उसका सेवन करने से सेहत लाभ और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यह परंपरा सिर्फ धार्मिक कारणों से ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देना बेहद शुभ माना जाता है। इसके लिए एक कलश या लोटे में स्वच्छ जल भरें और उसमें थोड़ा कच्चा दूध, चावल, मिश्री, चंदन और सफेद फूल डालें। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा की ओर मुख करके जल अर्पित करें। धीरे-धीरे धार बनाते हुए चंद्र देव को अर्घ्य चढ़ाएं।

अर्घ्य के समय मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी माना गया है। उदाहरण के लिए:

“ॐ सों सोमाय नमः”

“ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नमः”

इसके बाद हाथ जोड़कर चंद्र देव से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करनी चाहिए।

चंद्र देव को अर्घ्य देने के फायदे

मानसिक शांति – चंद्रमा मन का कारक ग्रह है। अर्घ्य देने से तनाव कम होता है और मन शांत रहता है।

स्वास्थ्य लाभ – पूर्णिमा की रात चंद्र किरणों को अमृतमयी माना गया है। यह शरीर को सकारात्मक ऊर्जा देती है।

सुख-समृद्धि – इस दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। अर्घ्य और पूजा से लक्ष्मी कृपा मिलती है।

चंद्र दोष निवारण – जिनकी कुंडली में चंद्रमा पीड़ित है, उनके लिए यह दिन अत्यंत लाभकारी होता है।

सौभाग्य में वृद्धि – शरद पूर्णिमा का व्रत और पूजा दांपत्य जीवन में मधुरता लाती है और सौभाग्य प्रदान करती है।

शरद पूर्णिमा का महत्व- शरद पूर्णिमा की रात केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी खास है। चंद्रमा की पूर्ण कलाओं से युक्त चांदनी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डालती है। यही वजह है कि इस रात को अमृत वर्षा की रात कहा गया है। इस दिन की पूजा, व्रत और अर्घ्य से जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का मार्ग खुलता है।

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Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi
योगेश जोशी हिंदुस्तान डिजिटल में सीनियर कंटेंट प्रड्यूसर हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मेहला गांव के रहने वाले हैं। पिछले छह सालों से पत्रकरिता कर रहे हैं। एनआरएआई स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेश से जर्नलिज्म में स्नातक किया और उसके बाद 'अमर उजाला डिजिटल' से अपने करियर की शुरुआत की, जहां धर्म और अध्यात्म सेक्शन में काम किया।लाइव हिंदुस्तान में ज्योतिष और धर्म- अध्यात्म से जुड़ी हुई खबरें कवर करते हैं। पिछले तीन सालों से हिंदुस्तान डिजिटल में कार्यरत हैं। अध्यात्म के साथ ही प्रकृति में गहरी रुचि है जिस कारण भारत के विभिन्न मंदिरों का भ्रमण करते रहते हैं। और पढ़ें
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