Sharad Purnima 2024: कार्तिकेय का जन्म,चांद बरसाता है अमृत, जानें शरद पूर्णिमा के दिन का महत्व

Oct 15, 2024 06:05 am ISTAnuradha Pandey हिन्दुस्तान टीम
share Share
Follow Us on

Sharad Purnima 2024 जीवन में आनंद, उत्सव और राग की प्रतीक है शरद पूर्णिमा। और ये सब जीवन में तभी आते हैं, जब आप निरोगी हों। शरद पूर्णिमा हमें स्वस्थ और निरोग रखने का दिन है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है।

Sharad Purnima 2024: कार्तिकेय का जन्म,चांद बरसाता है अमृत, जानें शरद पूर्णिमा के दिन का महत्व

जीवन में आनंद, उत्सव और राग की प्रतीक है शरद पूर्णिमा। और ये सब जीवन में तभी आते हैं, जब आप निरोगी हों। शरद पूर्णिमा हमें स्वस्थ और निरोग रखने का दिन है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत बरसता है। इसलिए लोग इस रात्रि को खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं, ताकि उसमें चंद्रमा की सुधामयी किरणों का प्रभाव आ जाए। चंद्रमा का जन्म समुद्र मंथन से हुआ था। समुद्र के इसी मंथन से देवी लक्ष्मी भी प्रकट हुई थीं और उन्होंने भगवान विष्णु का वरण किया था। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन ही देवी लक्ष्मी का जन्म हुआ था। समुद्र मंथन से उत्पन्न होने के कारण लक्ष्मी और चंद्रमा में भाई-बहन का रिश्ता माना जाता है। परंतु दक्षिण भारत में लक्ष्मी का जन्म फाल्गुन पूर्णिमा के दिन माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करने के लिए आती हैं और धर्मपूर्वक जीवन व्यतीत करनेवालों को अपना आशीर्वाद देती हैं। लोग उनके स्वागत में घरों में दीप जलाते हैं। इसी दिन चंद्रमा अपनी बहन से मिलने पृथ्वी के और निकट आ जाते हैं, लेकिन वे अकेले नहीं आते। अपने साथ अपनी अमृतमयी किरणों का उपहार भी पृथ्वीवासियों के लिए लाते हैं। शरद पूर्णिमा का एक नाम ‘कोजागरी’ पूर्णिमा भी है। कोजागर का अर्थ है—‘जो जाग रहा है।’ इस दिन ‘कोजागर’ यानी रातभर जाग कर व्रत रखा जाता है। इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं। इसे ‘नवान्न’ पूर्णिमा और ‘कौमुदी’ पूर्णिमा भी कहा जाता है।

शरद पूर्णिमा का महत्व
शरद पूर्णिमा के दिन ही श्रीकृष्ण ने ‘महारास’ रचाया था, इसलिए इसे ‘रास’ पूर्णिमा भी कहा जाता है। एक कथा है, कृष्ण ने ‘रास’ में सम्मिलित होने के लिए देवी पार्वती को निमंत्रण भेजा। पार्वती ने रास में शामिल होने के लिए भगवान शंकर से आज्ञा मांगी। कृष्ण के इस महारास के प्रति शिव भी मोहित हो गए और उन्होंने भी वहां पार्वती के साथ जाने का निश्चय किया। लेकिन वृंदावन पहुंचने पर, जब उन्हें यह पता चला कि इस महारास में कृष्ण के अलावा अन्य कोई पुरुष शामिल नहीं हो सकता, तो वे एक गोपी का रूप धारण करके उस महारास में शामिल हुए और गोपीश्वर यानी गोपेश्वर महादेव कहलाए। एक मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का जन्म हुआ था, इसलिए इसे ‘कुमार’ पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन ही अश्विनी कुमारों ने महर्षि च्यवन को औषधि-ज्ञान दिया था। इस दिन सुयोग्य जीवनसाथी पाने के लिए चंद्रमा की पूजा का विशेष विधान है।

अश्वनी कुमार

(इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर

अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


विजन

अनुराधा का उद्देश्य एस्ट्रोलॉजी (धर्म) के माध्यम से राशियों पर ग्रहों के प्रभाव, कुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, भाव और दशा-विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है। ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्या असर पड़ता है, इन जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को आम पाठकों के लिए सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही टीम का कुशल मार्गदर्शन और कंटेंट की क्वालिटी सुनिश्चित करना भी उनके विजन का अहम हिस्सा है।


विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र

कुंडली एवं ग्रह-दशा के माध्यम से राशियों पर ग्रहों का प्रभाव, नक्षत्रों का आम लोगों की जिंदगी पर असर और इससे जुड़ी एक्सपर्ट से वेरिफाइड सलाह पाठकों तक पहुंचाना उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र है। वे धार्मिक और समसामयिक विषयों पर गहराई से अध्ययन कर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती हैं। उनका अनुभव सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक और निरंतर शोध पर आधारित है। जन्म कुंडली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और वैदिक ज्योतिष पर उनकी गहरी पकड़ उनके लेखों को विश्वसनीय बनाती है। खबरों की दुनिया से इतर, अनुराधा जी को किताबें पढ़ना पसंद है, जो उनके शोधपरक लेखन को और समृद्ध बनाता है।


विशेषज्ञता

कुंडली एवं ग्रह-दशा
ग्रह नक्षत्रों का लोगों पर असर
धर्म एवं भारतीय परंपराएं
व्रत-त्योहारों का महत्व
ग्रहों की स्थिति और राशियां

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!